जम्मू-कश्मीर में राज्यसभा सीटों की स्थिति पर उठे सवाल

राज्यसभा सीटों का भविष्य
जम्मू-कश्मीर में राज्यसभा की चार सीटों के खाली रहने की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। इस मुद्दे पर कोई ठोस चर्चा नहीं हो रही है। यह तय नहीं है कि चारों सीटों का कार्यकाल एक साथ समाप्त होगा या हर दो साल में एक तिहाई सदस्यों के रिटायर होने के नियम के तहत इसे लागू किया जाएगा। यह मामला अब अदालत में पहुंच चुका है। हालांकि, कानून मंत्रालय चुनाव आयोग की राय से सहमत नहीं है। चुनाव आयोग का मानना है कि राज्य में राज्यसभा सीटों के लिए हर दो साल में एक तिहाई सीटें खाली होनी चाहिए। ऐसा माना जा रहा है कि चुनाव आयोग इस मुद्दे पर राष्ट्रपति के रेफरेंस के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट से निर्णय लेना चाहता है।
उल्लेखनीय है कि उप राष्ट्रपति का चुनाव नौ सितंबर को होने वाला है, जिसमें जम्मू-कश्मीर की केवल आधी हिस्सेदारी होगी। यहां के पांच लोकसभा सांसद वोट डालेंगे, लेकिन राज्यसभा में कोई सदस्य न होने के कारण उन्हें मतदान का अवसर नहीं मिलेगा। 2022 में राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी यही स्थिति थी। वास्तव में, फरवरी 2022 से राज्यसभा की सीटें खाली पड़ी हैं। पंजाब और दिल्ली में स्थिति भिन्न है, जहां सभी सीटों के चुनाव की अधिसूचना अलग-अलग जारी होती है। इससे सत्ताधारी पार्टी को सभी सीटें मिल जाती हैं। यदि जम्मू-कश्मीर में ऐसा होता है, तो चारों सीटें सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस को मिल जाएंगी। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि दिल्ली और पंजाब की तरह की व्यवस्था नहीं होगी। चारों सीटों की अधिसूचना एक साथ जारी की जाएगी, जिससे कम से कम एक सीट भाजपा को मिलना तय है।