जलवायु परिवर्तन से प्रभावित भारत की गर्मी: यूएन प्रमुख की चेतावनी
नई दिल्ली में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने बताया कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों में हो रही अत्यधिक गर्मी का संबंध जलवायु परिवर्तन से है, जो मुख्य रूप से कोयला, तेल और गैस के उपयोग के कारण हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि वैश्विक तापमान में वृद्धि से चरम मौसम की घटनाएं और भी अधिक खतरनाक और लगातार होती जा रही हैं।
स्टील ने बुधवार को एक बयान में कहा कि इस गर्मी का लोगों और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से उन व्यक्तियों का उल्लेख किया जो बिना कूलिंग सिस्टम वाले घरों में रहते हैं और उन श्रमिकों की बात की जो इस तेज धूप में लंबे समय तक काम करते हैं।
स्टील का तापमान पर बयान
रिकॉर्ड तोड़ तापमान पर क्या बोले स्टील
यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज के कार्यकारी सचिव साइमन स्टील ने कहा कि यह रिकॉर्ड तोड़ तापमान दर्शाता है कि देशों को तुरंत प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, सरकारों को स्वच्छ ऊर्जा और ऐसे सिस्टम में अधिक निवेश करना चाहिए जो लोगों को बढ़ते तापमान से निपटने में सहायता कर सकें। यह बयान उस समय आया है जब भारत मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी दी है कि मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में अगले कुछ दिनों तक भीषण गर्मी और लू का प्रकोप जारी रह सकता है।
इस भयंकर गर्मी के कारण भारत में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। पीक पावर डिमांड 18 मई को 257.3 गीगावाट तक पहुंच गई और इसके बाद भी बढ़ती रही। यह 19 मई को 260.4 गीगावाट, 20 मई को 265 गीगावाट और 21 मई को रिकॉर्ड 270.8 गीगावाट पर पहुंच गई।
सौर ऊर्जा के महत्व पर स्टील का दृष्टिकोण
सौर ऊर्चा को लेकर क्या कहा?
स्टील ने कहा कि सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों ने भारत को दिन के समय बिजली की भारी मांग को संभालने में काफी मदद की है। उन्होंने सौर ऊर्जा को तेजी से बढ़ाने के भारत के प्रयासों की सराहना की और कहा कि ये कदम मौजूदा संकट में देश के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्वच्छ ऊर्जा केवल जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए ही नहीं, बल्कि सस्ती और विश्वसनीय बिजली प्रदान करने के लिए भी आवश्यक है। इससे अस्पतालों, व्यवसायों और इलेक्ट्रिक परिवहन जैसी आवश्यक सेवाओं को चालू रखने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के कारण तेल-गैस की कीमतें पहले से ही बढ़ रही हैं, इसलिए भारत को अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्थायी ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
