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जाति जनगणना पर कांग्रेस और सरकार के बीच बढ़ता विवाद

कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच जाति जनगणना को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाया है कि वे जनता को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने सरकार के बदलते रुख पर सवाल उठाए हैं और इसे नीतिगत स्पष्टता की कमी बताया है। आने वाले समय में यह मुद्दा संसद और चुनावी मैदान में बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और इसके राजनीतिक प्रभावों के बारे में।
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जाति जनगणना पर कांग्रेस और सरकार के बीच बढ़ता विवाद

सियासी टकराव की नई परतें

नई दिल्ली। कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच जाति जनगणना को लेकर विवाद गहरा गया है। जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया है कि वे देश को गुमराह कर रहे हैं और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक विस्तृत टाइमलाइन पेश की है, जिसमें दावा किया गया है कि सरकार अपने पूर्व के रुख से पलट गई है।


जयराम रमेश का आरोप- “PM जनता को भ्रमित कर रहे हैं”

जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार जाति जनगणना के मुद्दे पर जनता को भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले सरकार ने इसे न करने का निर्णय लिया था, लेकिन अब राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार अपना रुख बदल रही है। यह स्थिति “नीतिगत स्पष्टता की कमी” को दर्शाती है। कांग्रेस नेता ने 2021 से 2026 तक की घटनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार पर हमला किया। उन्होंने बताया कि जुलाई 2021 में लोकसभा में सरकार ने स्पष्ट किया था कि SC/ST के अलावा अन्य जातियों की गिनती नहीं होगी। इसके बाद सितंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे में भी यही रुख दोहराया गया। जयराम रमेश ने यह भी याद दिलाया कि अप्रैल 2024 में एक इंटरव्यू में पीएम मोदी ने कांग्रेस पर जाति जनगणना की मांग को लेकर “शहरी नक्सली मानसिकता” का आरोप लगाया था। लेकिन अप्रैल 2025 में सरकार ने अचानक घोषणा की कि आगामी जनगणना में जाति जनगणना भी शामिल होगी।


कानून में संशोधन पर उठे सवाल

जयराम रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के अनुच्छेद 334-A में संशोधन करना चाहती है। उनका कहना है कि सरकार यह तर्क दे रही है कि जाति जनगणना के परिणाम आने में समय लगेगा, जबकि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने कम समय में अपने जातीय सर्वे पूरे कर लिए थे। उन्होंने कहा कि संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित कानून में बदलाव की कोशिश के पीछे “छिपा एजेंडा” यही है कि जाति जनगणना को टाला जा सके। जाति जनगणना का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण बन गया है। कांग्रेस इसे सामाजिक न्याय से जोड़कर देख रही है, जबकि बीजेपी पर आरोप है कि वह इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख नहीं अपना रही। आने वाले समय में यह मुद्दा संसद से लेकर चुनावी मैदान तक बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।