जेएनयू में आपत्तिजनक नारेबाजी पर प्रशासन की सख्त कार्रवाई
जेएनयू प्रशासन की चेतावनी
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रशासन ने मंगलवार को एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा है कि परिसर में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाने वाले छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा की जाएगी।
जांच और संभावित दंड
प्रशासन ने बताया कि इस मामले में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और जांच जारी है। छात्रों को विश्वविद्यालय से निष्कासित या निलंबित किया जा सकता है। जेएनयू प्रशासन ने कहा कि विश्वविद्यालय विचारों के आदान-प्रदान और नवाचार का केंद्र है, लेकिन इसे घृणा का स्थान नहीं बनने दिया जाएगा।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अनुशासन
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर हिंसा या राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घटना में शामिल छात्रों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें निलंबन और निष्कासन शामिल हैं।
शैक्षणिक गरिमा बनाए रखना
जेएनयू प्रशासन ने कहा कि परिसर की शैक्षणिक और अनुशासनात्मक गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार की अराजकता पर जीरो टॉलरेंस नीति लागू की जाएगी।
घटना का विवरण
ज्ञात हो कि सबरमती हॉस्टल के बाहर नारेबाजी के मामले में मंगलवार सुबह पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का औपचारिक अनुरोध भेजा गया था। प्रशासन ने बताया कि 5 जनवरी की रात लगभग 10 बजे, जेएनयू छात्रसंघ से जुड़े छात्रों ने एक कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसका उद्देश्य 5 जनवरी 2020 को परिसर में हुई हिंसा की छठी बरसी मनाना था।
नारेबाजी का स्वरूप
शुरुआत में यह सभा केवल बरसी तक सीमित थी, जिसमें लगभग 30 से 35 छात्र शामिल थे। शिकायत में जिन प्रमुख छात्रों के नाम शामिल हैं, उनमें अदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली, साद अजमी, महबूब इलाही, कनिष्क, पकीजा खान, शुभम आदि शामिल हैं।
न्यायिक फैसले का प्रभाव
पत्र में कहा गया है कि उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर आए न्यायिक फैसले के बाद कार्यक्रम का स्वरूप बदल गया। कुछ छात्रों ने आपत्तिजनक और भड़काऊ नारे लगाने शुरू कर दिए।
सुरक्षा विभाग की मौजूदगी
प्रशासन का कहना है कि यह कृत्य न केवल लोकतांत्रिक असहमति की सीमाओं से परे है, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के प्रति खुला अनादर भी है। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि ऐसी नारेबाजी जेएनयू की आचार संहिता का उल्लंघन है। विश्वविद्यालय का कहना है कि इससे परिसर की शांति और सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।
सुरक्षा अधिकारियों की भूमिका
विश्वविद्यालय के अनुसार, घटना के समय सुरक्षा विभाग के अधिकारी स्थल पर मौजूद थे, जिनमें निरीक्षक गोरखनाथ, सुपरवाइजर विशाल कुमार, और सुरक्षा गार्ड जय कुमार मीणा और पूजा शामिल थीं। वे लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे थे।
