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जेएनयू में उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में प्रदर्शन

जेएनयू में छात्रों ने उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में प्रदर्शन किया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री शाह के खिलाफ नारे लगाए गए। कांग्रेस ने इसे गुस्सा जाहिर करने का एक तरीका बताया। इस प्रदर्शन का उद्देश्य 2020 में हुई हिंसा की निंदा करना था। जेएनयू प्रशासन ने नारेबाजी के लिए एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। जानें इस विरोध प्रदर्शन के पीछे की पूरी कहानी।
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जेएनयू में उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में प्रदर्शन

प्रदर्शन का उद्देश्य


कांग्रेस का बयान
जेवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी की गई। छात्रों ने कहा कि मोदी-शाह की कब्र खुदेगी। बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि यह प्रदर्शन उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में था। कांग्रेस ने इसे गुस्सा जाहिर करने का एक तरीका बताया।


विरोध प्रदर्शन का कारण

जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने बताया कि हर साल छात्र 5 जनवरी 2020 को कैंपस में हुई हिंसा की निंदा करने के लिए प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि सभी नारे वैचारिक थे और किसी पर व्यक्तिगत हमला नहीं करते थे। दरअसल, एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किया था।


एफआईआर की मांग

मंगलवार को जेएनयू प्रशासन ने वसंत कुंज पुलिस को पत्र लिखकर साबरमती हॉस्टल के बाहर नारे लगाने के लिए एफआईआर दर्ज करने की मांग की।


लोकतांत्रिक विरोध का उल्लंघन

नारेबाजी को लोकतांत्रिक विरोध के खिलाफ बताया गया है। यह जेएनयू के कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन है और इससे कैंपस में शांति और सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। नारे स्पष्ट रूप से सुनाई दे रहे थे और जानबूझकर लगाए गए थे।


नाइंसाफी का आरोप

कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि यह गुस्सा 2020 दिल्ली दंगों की साजिश मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि उमर खालिद और शरजील इमाम के साथ नाइंसाफी हुई है।