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जेट फ्यूल की कीमतों में वृद्धि: क्या हवाई यात्रा महंगी होगी?

हाल ही में जेट फ्यूल की कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है, जिससे हवाई यात्रा महंगी होने की संभावना बढ़ गई है। केंद्र सरकार ने बताया कि एयरलाइंस के लिए ईंधन की कीमतों में आंशिक वृद्धि की गई है। इस लेख में जानें कि कैसे वैश्विक तनाव और घरेलू बाजार की स्थिति ने इन कीमतों को प्रभावित किया है और एयरलाइंस पर इसका क्या असर पड़ेगा।
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जेट फ्यूल की कीमतों में वृद्धि: क्या हवाई यात्रा महंगी होगी?

जेट फ्यूल की कीमतों में वृद्धि


जेट फ्यूल की कीमतों में वृद्धि: हाल ही में जेट फ्यूल के दाम में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। देश के प्रमुख शहरों में ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल को बताया कि तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के परामर्श से एयरलाइंस के लिए केवल आंशिक और चरणबद्ध तरीके से 25% (केवल ₹ 15/लीटर) की वृद्धि लागू की है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि विदेशी मार्गों पर जेट ईंधन (ATF) की कीमतों में हुई पूरी वृद्धि का भुगतान अंतरराष्ट्रीय दरों के अनुसार किया जाएगा, और इसका घरेलू हवाई किरायों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।


पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, "भारत में एटीएफ की कीमतें 2001 में नियंत्रण मुक्त कर दी गई थीं और इन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार मासिक रूप से संशोधित किया जाता है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में असाधारण स्थिति के कारण, 1 अप्रैल को घरेलू बाजारों के लिए एटीएफ की कीमत में 100% से अधिक की वृद्धि की संभावना थी।"


इतिहास में पहली बार, जेट फ्यूल की कीमत ₹2 लाख प्रति किलोलीटर के आंकड़े को पार कर गई है, जिससे आने वाले दिनों में हवाई टिकटों की कीमतें बढ़ने की आशंका बढ़ गई है।


एयरलाइन कंपनियों के कुल खर्च का लगभग 40% हिस्सा केवल ईंधन (ATF) पर खर्च होता है, इसलिए जब ईंधन महंगा होता है, तो कंपनियों के पास यात्रियों पर बोझ डालने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।


ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है, जिससे सप्लाई प्रभावित हुई है और कीमतें बढ़ी हैं। हालांकि बढ़ोतरी कम है, फिर भी इससे एयरलाइंस पर दबाव बढ़ेगा, क्योंकि जेट फ्यूल उनके खर्च का एक बड़ा हिस्सा होता है।