जेट फ्यूल की कीमतों में वृद्धि से हवाई यात्रा महंगी, एयरलाइंस ने बढ़ाए सरचार्ज
जेट फ्यूल की कीमतों में उछाल
अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण जेट फ्यूल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। पहले जहां यह 85-90 डॉलर प्रति बैरल थी, अब यह 150-200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। एविएशन क्षेत्र में ईंधन की लागत कुल खर्च का लगभग 25 प्रतिशत होती है, जिसके चलते एयरलाइंस ने टिकटों की कीमतें बढ़ा दी हैं, नए सरचार्ज लागू किए हैं और कई उड़ानों की संख्या में कमी की है।
एयर इंडिया का नया फ्यूल सरचार्ज
एयर इंडिया ने घरेलू उड़ानों के लिए एक नया फ्यूल सरचार्ज सिस्टम लागू किया है। 8 अप्रैल से, 0-500 किलोमीटर की उड़ानों पर 299 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगेगा, जबकि 2000 किलोमीटर से अधिक की उड़ानों पर यह शुल्क 899 रुपये तक होगा। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी यह नया सरचार्ज 10 अप्रैल से लागू हो गया है।
इंडिगो और अकासा एयर का सरचार्ज
देश की प्रमुख एयरलाइन इंडिगो ने 2 अप्रैल से नए बुकिंग पर घरेलू उड़ानों पर 950 रुपये और लंबी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर 10,000 रुपये तक का फ्यूल सरचार्ज लगाने की घोषणा की है। इसी तरह, अकासा एयर ने भी 15 मार्च से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर 199 से 1300 रुपये तक का सरचार्ज शुरू किया है, जो पुरानी बुकिंग पर लागू नहीं होगा।
एयर एशिया और अन्य एयरलाइंस की उड़ानों में कमी
मलेशिया की एयरएशिया ने 10 प्रतिशत उड़ानों में कमी की है और 20 प्रतिशत का फ्यूल सरचार्ज लगाया है। एयर न्यूजीलैंड ने मई और जून में कई उड़ानें रद्द कर दी हैं और टिकटों की कीमतें बढ़ा दी हैं। फ्रांस की एयर फ्रांस-केएलएम ने लंबी दूरी की उड़ानों के लिए टिकटों की कीमतें 50 यूरो (लगभग 5000 रुपये) तक बढ़ा दी हैं।
अमेरिकी एयरलाइंस की बैगेज फीस में वृद्धि
अमेरिकी एयरलाइंस जैसे यूनाइटेड, डेल्टा, अमेरिकन और अलास्का ने भी बैगेज फीस बढ़ा दी है। यूनाइटेड एयरलाइंस ने पहले और दूसरे बैगेज पर 10 डॉलर (830 रुपये) का अतिरिक्त शुल्क लगाया है। डेल्टा ने बैगेज फीस में 10-50 डॉलर की वृद्धि की है और अपनी उड़ानों की संख्या 3.5 प्रतिशत कम करने का निर्णय लिया है।
तुर्की एयरलाइंस का नया सरचार्ज
तुर्की की सनएक्सप्रेस (तुर्किश एयरलाइंस और लुफ्थांसा का संयुक्त उद्यम) ने मई से यूरोप के रूट पर 10 यूरो का अस्थायी फ्यूल सरचार्ज लागू किया है। कई एयरलाइंस ने नई योजनाओं को स्थगित कर दिया है और लागत कम करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
यात्रियों पर बढ़ता वित्तीय बोझ
अब हवाई यात्रा यात्रियों के लिए महंगी होती जा रही है, यहां तक कि छोटी उड़ानों पर भी अतिरिक्त शुल्क देना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि युद्ध के कारण तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो एविएशन उद्योग को और भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
