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जैकलीन फर्नांडिस ने सुकेश चंद्रशेखर मामले में सरकारी गवाह बनने की इच्छा जताई

बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस ने सुकेश चंद्रशेखर के 200 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सरकारी गवाह बनने की इच्छा जताई है। ईडी ने इस मामले में उन्हें सह-आरोपी बनाया है। हाल ही में कोर्ट में हुई सुनवाई में जैकलीन के वकील ने याचिका दायर की, जिसके बाद अगली सुनवाई 8 मई को निर्धारित की गई है। जानें इस मामले में क्या नया हो सकता है और जैकलीन को सरकारी गवाह बनने की अनुमति मिलेगी या नहीं।
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जैकलीन फर्नांडिस ने सुकेश चंद्रशेखर मामले में सरकारी गवाह बनने की इच्छा जताई

ईडी ने मांगा समय, अगली सुनवाई 8 मई को


बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस लंबे समय से सुकेश चंद्रशेखर के 200 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें भी सह-आरोपी के रूप में नामित किया है। हाल ही में यह जानकारी सामने आई थी कि जैकलीन इस मामले में सरकारी गवाह बनना चाहती हैं।


17 अप्रैल को उनके वकील ने दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने बताया कि जैकलीन सरकारी गवाह बनने की इच्छा रखती हैं। इसके बाद कोर्ट ने ईडी को नोटिस जारी किया। आज, 20 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई हुई।


सुनवाई के दौरान, ईडी ने जैकलीन की याचिका पर जवाब देने के लिए समय मांगा है, जिसमें उन्होंने सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सरकारी गवाह बनने की अनुमति मांगी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 मई को होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या जैकलीन को सरकारी गवाह बनने की अनुमति मिलती है।


सुकेश और उसकी पत्नी पर आरोप

मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित मामले में सुकेश चंद्रशेखर और उसकी पत्नी लीना पॉलोज को दिल्ली पुलिस ने अन्य आरोपियों के साथ गिरफ्तार किया था। इस मामले में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (एमसीओसीए) भी लगाया गया है। सुकेश और उसकी पत्नी पर आरोप है कि उन्होंने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर हवाला का उपयोग किया और अपराध से अर्जित धन को ठिकाने लगाने के लिए मुखैटा कंपनियां बनाई।


महंगे गिफ्ट्स का मामला

सुकेश चंद्रशेखर ने जैकलीन को कई महंगे उपहार दिए थे, जिसके कारण वह ईडी के रडार पर आ गईं और उन्हें सह-आरोपी बना दिया गया। ईडी पहले भी उन्हें कई बार पूछताछ के लिए बुला चुकी है। अब जैकलीन ने सरकारी गवाह बनने का निर्णय लिया है। यदि ईडी उनकी याचिका को स्वीकार कर लेती है, तो इससे उन्हें राहत मिल सकती है।