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झारखंड एयर एम्बुलेंस दुर्घटना: जांच में सामने आई चौंकाने वाली बातें

झारखंड के चतरा जिले में हुई एयर एम्बुलेंस दुर्घटना की जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट में यह पता चला है कि विमान में ब्लैक बॉक्स नहीं था, जिससे हादसे के कारणों का पता लगाना मुश्किल हो गया है। इस दुर्घटना में सात लोगों की जान चली गई, जिनमें एक मरीज और उसके चिकित्सकीय स्टाफ शामिल थे। परिवार ने मुआवजे और न्याय की मांग की है। जानें इस मामले में और क्या जानकारी मिली है और जांच के अगले कदम क्या होंगे।
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झारखंड एयर एम्बुलेंस दुर्घटना: जांच में सामने आई चौंकाने वाली बातें

दुर्घटना की जांच जारी


झारखंड के चतरा जिले में हुई एयर एम्बुलेंस दुर्घटना की जांच चल रही है। प्रारंभिक रिपोर्ट में यह सामने आया है कि दुर्घटनाग्रस्त विमान में ब्लैक बॉक्स नहीं था, जिससे हादसे के कारणों का पता लगाना और भी कठिन हो गया है।


सात लोगों की जान गई

सोमवार रात रांची से दिल्ली की ओर उड़ान भरने वाली इस एयर एम्बुलेंस में सात लोग सवार थे, जिनमें एक मरीज, डॉक्टर, पैरामेडिक, दो परिचारक और दो पायलट शामिल थे। दुर्भाग्यवश, इस हादसे में सभी की जान चली गई।


रिकॉर्डर की अनुपस्थिति

जांच अधिकारियों के अनुसार, इस विमान में न तो कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) था और न ही फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (एफडीआर)। नागरिक उड्डयन नियमों के अनुसार, 5,700 किलोग्राम से कम वजन वाले विमानों में इन उपकरणों का होना अनिवार्य नहीं है। इसके बिना, दुर्घटना के कारणों की सटीक जानकारी प्राप्त करना मुश्किल हो जाता है। अब जांच एजेंसियां एयर ट्रैफिक कंट्रोल के रिकॉर्ड, मलबे के परीक्षण और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर हादसे की वजह जानने की कोशिश कर रही हैं।


खराब मौसम की भूमिका

जानकारी के अनुसार, खराब मौसम और आंधी-तूफान इस दुर्घटना के संभावित कारण हो सकते हैं। अन्य एयरलाइंस ने भी इस मार्ग पर खराब मौसम की पुष्टि की है। बताया गया है कि एयर एम्बुलेंस ने मौसम की खराबी के कारण अपना मार्ग बदलने का अनुरोध किया था। सूत्रों के अनुसार, अन्य विमानों ने बाईं ओर मुड़ने का अनुरोध किया, जबकि इस एयर एम्बुलेंस ने दाईं ओर मुड़ने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, वास्तविक कारणों का पता नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) की विस्तृत जांच के बाद ही चलेगा।


विमान की तकनीकी स्थिति

जांच में यह भी सामने आया है कि दुर्घटनाग्रस्त बीचक्राफ्ट सी90 किंग एयर विमान 2018 से 2022 तक संचालन में नहीं था। इस विमान का संचालन दिल्ली स्थित रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जा रहा था। यह भी जांचा जा रहा है कि लंबे समय तक उपयोग में न रहने के बाद विमान की तकनीकी स्थिति क्या थी।


परिजनों की मांग

इस हादसे में जान गंवाने वाले मरीज संजय कुमार के परिवार ने मुआवजे और न्याय की मांग की है। परिजनों का कहना है कि उनकी गंभीर स्थिति के कारण डॉक्टरों ने उन्हें हवाई मार्ग से दिल्ली ले जाने की सलाह दी थी। परिवार ने एयर एम्बुलेंस की व्यवस्था के लिए लगभग 8 लाख रुपये खर्च किए थे और अब वे हादसे की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।