झारखंड की मेगालिथिक विरासत के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग
झारखंड प्रतिनिधिमंडल का यूके दौरा
झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने यूनाइटेड किंगडम में महत्वपूर्ण संस्थानों और विशेषज्ञ समूहों के साथ बैठकें कीं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य झारखंड की प्राचीन मेगालिथ और मोनोलिथ विरासत का संरक्षण, पुनर्स्थापन (Conservation & Restoration), वैज्ञानिक प्रबंधन और वैश्विक मान्यता प्राप्त करना था।
विश्व धरोहर की सूची में शामिल करने का प्रयास
ऐतिहासिक संरचनाओं का संरक्षण
बैठक में मेगालिथिक स्थलों के वैज्ञानिक दस्तावेज़ीकरण, संरचनात्मक संरक्षण, परिदृश्य प्रबंधन, समुदाय की भागीदारी और दीर्घकालिक संरक्षण रणनीतियों पर चर्चा की गई। विशेष रूप से, आदिवासी समुदायों से जुड़ी इन ऐतिहासिक संरचनाओं को संरक्षित करने के लिए यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए एक ठोस प्रस्तुति तैयार करने पर जोर दिया गया।
संभावित सहयोग के क्षेत्रों की पहचान
इन संवादों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पुरातत्व, विरासत संरक्षण, इंजीनियरिंग और परामर्श के अनुभवों का लाभ उठाने के लिए संभावित सहयोग के क्षेत्रों की पहचान की गई। राज्य सरकार इन विशेषज्ञ सुझावों के आधार पर एक स्पष्ट और व्यावहारिक रोडमैप तैयार करेगी, जिससे झारखंड की मेगालिथिक विरासत का संरक्षण संरचनात्मक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक स्तरों पर मजबूत हो सके।
आने वाली पीढ़ियों के लिए धरोहर का संरक्षण
मंत्री का बयान
इस अवसर पर, मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार मेगालिथिक विरासत के संरक्षण और सतत प्रबंधन के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि यह विरासत केवल पुरातात्विक धरोहर नहीं, बल्कि आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है, और इसके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का सहारा लिया जाएगा।
प्रमुख बैठकें
बैठक में शामिल प्रमुख संस्थान: Museum of London Archaeology (MOLA), University College London, Wardell Armstrong / SLR Consulting, और अन्य विशेषज्ञ।
