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ट्रंप और नेतन्याहू के बीच फोन पर हुई तीखी बहस से मिडिल ईस्ट की राजनीति में हलचल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर हुई तीखी बहस ने मिडिल ईस्ट की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बातचीत में नेतन्याहू ने ईरान पर भरोसा न करने की बात कही, जबकि ट्रंप ने कूटनीति को प्राथमिकता देने की सलाह दी। जानें इस बहस के पीछे के राजनीतिक और रणनीतिक कारण और कैसे यह इजराइल की आंतरिक राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
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ट्रंप और नेतन्याहू के बीच फोन पर हुई तीखी बहस से मिडिल ईस्ट की राजनीति में हलचल

वॉशिंगटन में ट्रंप-नेतन्याहू की बातचीत का खुलासा

वॉशिंगटन: ईरान के परमाणु समझौते और युद्ध के मुद्दे पर अमेरिका और इजराइल के बीच की अंदरूनी कलह अब पूरी तरह से उजागर हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर हुई बातचीत में तीखी बहस की खबरें आई हैं। मंगलवार (19 मई) को हुई इस कॉल में दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को जमकर खरी-खोटी सुनाई। यह बहस लगभग 30 मिनट तक चली, जिसमें ट्रंप ने नेतन्याहू को ईरान के खिलाफ युद्ध को आगे न बढ़ाने की सलाह दी, जिससे इजराइली प्रधानमंत्री भड़क गए।


नेतन्याहू का ईरान पर विश्वास न करने का बयान

ईरान पर भरोसा नहीं, यह सिर्फ वक्त की बर्बादी: नेतन्याहू

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने फोन पर बातचीत के दौरान आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान पर भरोसा नहीं किया जा सकता और यह केवल समय बर्बाद कर रहा है। नेतन्याहू ने ट्रंप को चेतावनी दी कि युद्ध के अवसर बार-बार नहीं आते और इजराइल पीछे नहीं हटेगा।


ट्रंप का कूटनीति पर जोर

कूटनीति की भी अपनी दुनिया होती है, हमारे लिए सिर्फ इजराइल ही प्राथमिकता नहीं: ट्रंप

नेतन्याहू के कड़े रुख को सुनकर ट्रंप ने भी कड़े शब्दों में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के लिए मिडिल ईस्ट में केवल इजराइल ही प्राथमिकता नहीं है। ट्रंप ने अन्य पड़ोसी देशों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका ने क्षेत्र के अन्य देशों से भी बातचीत की है और सभी शांति तथा वार्ता के पक्ष में हैं। उन्होंने नेतन्याहू को समझाया कि कूटनीति में समय लगता है।


कतर के साथ युद्ध समाप्त करने की कोशिश

कतर के साथ मिलकर युद्ध खत्म करने के मसौदे पर काम कर रहा अमेरिका

व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार, ट्रंप ने नेतन्याहू को बताया कि इस समय कतर और अन्य मध्यस्थ देश एक ऐसे मसौदे पर काम कर रहे हैं, जिस पर अमेरिका और ईरान दोनों हस्ताक्षर करेंगे ताकि युद्ध को समाप्त किया जा सके। ट्रंप के बातचीत और समझौते पर जोर देने के बाद नेतन्याहू गहरे गुस्से में नजर आए, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया।


नेतन्याहू की युद्ध की इच्छा के पीछे के कारण

आखिर क्यों हर हाल में ईरान से जंग चाहते हैं बेंजामिन नेतन्याहू?

इस बहस के पीछे कई राजनीतिक और रणनीतिक कारण हैं। अमेरिका और ईरान के बीच जिन मुद्दों पर बातचीत चल रही है, उनमें ईरान का पलड़ा भारी दिख रहा है, जो इजराइल के लिए चिंता का विषय है। अगर ईरान की स्थिति मजबूत होती है, तो इजराइल की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, नेतन्याहू इजराइल की आंतरिक राजनीति में भी दबाव में हैं और ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू कर अपनी लोकप्रियता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।