ट्रंप का स्पष्ट संदेश: ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलेंगे
पोप और ट्रंप के बीच बढ़ती बयानबाजी
वाशिंगटन: ईरान युद्ध के आरंभ के बाद से कैथोलिक चर्च के प्रमुख पोप लियो और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच तीखी बयानबाजी जारी है। पोप लियो ने युद्ध को मानवता पर एक कलंक बताते हुए तत्काल युद्धविराम की मांग की थी, जिसके बाद ट्रंप ने उन पर आरोप लगाया कि वे तेहरान के परमाणु हथियारों के समर्थन में हैं, जबकि अमेरिका इसे कभी स्वीकार नहीं करेगा।
पोप का स्पष्ट रुख
मंगलवार को पोप लियो ने कहा कि उन्होंने कभी भी परमाणु हथियारों का समर्थन नहीं किया और आलोचकों को सच बोलने की सलाह दी। यह बयान ट्रंप की उस टिप्पणी के जवाब में था, जिसमें उन पर ईरान युद्ध के प्रति अपने रुख के कारण कैथोलिकों को खतरे में डालने का आरोप लगाया गया था।
ट्रंप का ईरान पर रुख
बुधवार को व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान, जब ट्रंप से पूछा गया कि विदेश सचिव मार्को रुबियो पोप से मिलने वाले हैं, तो उन्होंने कहा कि उनका ईरान पर रुख स्पष्ट है। ट्रंप ने कहा, 'मैं पोप को खुश करने की कोशिश नहीं कर रहा, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते।'
वैश्विक स्थिरता का खतरा
ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान के पास परमाणु हथियार होते हैं, तो यह वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा बनेगा। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया बंधक बन जाएगी और हम इसे होने नहीं देंगे।
पोप की शांति की अपील
मार्च में, सेंट पीटर्स स्क्वायर में पोप ने कहा था कि हमें संघर्षों के शिकार लोगों के दुख के प्रति खामोश नहीं रहना चाहिए। उन्होंने शांति की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
ट्रंप की आलोचना
अप्रैल में, ट्रंप ने पोप की आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें ऐसा पोप नहीं चाहिए जो उनकी आलोचना करे और जो चाहता हो कि ईरान के पास परमाणु हथियार हों।
