Newzfatafatlogo

ट्रम्प की टीम ईरान के साथ सीजफायर वार्ता की कोशिश में

डोनाल्ड ट्रम्प की टीम ईरान के साथ सीजफायर वार्ता करने की कोशिश कर रही है, जिसमें ईरान ने कुछ शर्तें रखी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत नहीं हो रही है, लेकिन मिस्र, कतर और ब्रिटेन जैसे देश मध्यस्थता का कार्य कर रहे हैं। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और क्या मांगें की जा रही हैं।
 | 
ट्रम्प की टीम ईरान के साथ सीजफायर वार्ता की कोशिश में

ईरान की शर्तें: हमले की गारंटी और मुआवजा


डोनाल्ड ट्रम्प की टीम ईरान के साथ सीजफायर पर बातचीत करने की योजना बना रही है। इस प्रक्रिया में ट्रम्प के सलाहकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ शामिल हैं। एक्सियोस न्यूज के अनुसार, ईरान ने बातचीत के लिए कुछ शर्तें रखी हैं, जिसमें यह सुनिश्चित करना शामिल है कि भविष्य में कोई हमला नहीं होगा और उसे हुए नुकसान का मुआवजा भी चाहिए।


मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे देश

ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि वे ईरान की सभी शर्तें, विशेषकर मुआवजे की मांग, मानने के लिए तैयार नहीं हैं। वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत नहीं हो रही है, लेकिन मिस्र, कतर और ब्रिटेन जैसे देश मध्यस्थता का कार्य कर रहे हैं।


ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर अमेरिका की मांग

अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने मिसाइल कार्यक्रम को कुछ समय के लिए बंद करे, यूरेनियम संवर्धन रोके और अपने परमाणु स्थलों को भी बंद करे। इसके अलावा, ईरान को हिजबुल्लाह और हमास को वित्तीय सहायता देना भी बंद करना होगा।


ब्रिक्स देशों की भूमिका

ईरान के राष्ट्रपति मसूज पजशकियान ने हाल ही में पीएम मोदी से फोन पर बात की। उन्होंने ब्रिक्स देशों से अपील की कि वे ईरान पर हो रहे हमलों को रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएं।


ब्रिटेन की न्यूक्लियर पनडुब्बी की तैनाती

ब्रिटेन की एक न्यूक्लियर पनडुब्बी, एचएमएस एंसन, अरब सागर में तैनात की गई है। यह पनडुब्बी लॉन्ग रेंज टॉमहॉक मिसाइलों और शक्तिशाली टॉरपीडो से लैस है। यदि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री से अनुमति मिलती है, तो यह पनडुब्बी सतह के पास आकर मिसाइल दाग सकती है।


समुद्री सुरक्षा के लिए ब्रिटेन की योजना

ब्रिटेन ने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर समुद्री रास्तों की सुरक्षा के लिए योजना बनाने की बात कही है। हालांकि, उसने यह भी स्पष्ट किया है कि वह इस संघर्ष में पूरी तरह से शामिल नहीं होना चाहता। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि यदि ब्रिटेन अमेरिका और इजराइल का समर्थन करता है, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।