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ट्रम्प के आयात शुल्क से अमेरिका की वैश्विक छवि पर असर

डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत पर लगाए गए 50% आयात शुल्क ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है। पूर्व व्हाइट हाउस अधिकारी जेक सुलिवन ने इस नीति की कड़ी आलोचना की है, यह कहते हुए कि इससे अमेरिका की ब्रांड छवि को नुकसान हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत को चीन के करीब ले जा सकता है, जिससे अमेरिका की वैश्विक साख में गिरावट आ रही है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है और इसके संभावित प्रभाव क्या हो सकते हैं।
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ट्रम्प के आयात शुल्क से अमेरिका की वैश्विक छवि पर असर

अमेरिकी राष्ट्रपति का विवादास्पद निर्णय

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत पर 50% आयात शुल्क लगाने के फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। पूर्व व्हाइट हाउस अधिकारी जेक सुलिवन ने इस नीति की तीखी आलोचना की है, यह कहते हुए कि इससे अमेरिकी ब्रांड की छवि को नुकसान हो रहा है। सुलिवन, जो बाइडन प्रशासन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रह चुके हैं, ने द बलवर्क पॉडकास्ट पर कहा कि यह कदम भारत और चीन के बीच संबंधों को मजबूत कर सकता है, जो अमेरिका के लिए रणनीतिक दृष्टि से हानिकारक है। उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रम्प की नीतियां भारत को बीजिंग के करीब धकेल रही हैं।


अमेरिका की साख में गिरावट

वैश्विक मंच पर घट रही अमेरिका की साख

सुलिवन ने बताया कि एक साल पहले अमेरिका की लोकप्रियता कई देशों में चीन से अधिक थी, लेकिन अब यह स्थिति बदल गई है। ट्रम्प के टैरिफ के कारण वैश्विक नेता अमेरिका को एक 'अस्थिर शक्ति' मानने लगे हैं। भारत जैसे देश अब चीन के साथ सहयोग बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं, खासकर 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार के बाद। सुलिवन ने कहा कि ट्रम्प का यह कदम भारत के साथ गहरे और स्थायी संबंध बनाने की अमेरिकी कोशिशों को कमजोर कर रहा है।


विशेषज्ञों की आलोचना

ट्रम्प की नीति पर विशेषज्ञों की आलोचना

ट्रम्प की टैरिफ नीति की आलोचना केवल सुलिवन तक सीमित नहीं है। पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी ने इसे 'अल्टीमेटम की नीति' करार दिया है, जो बिना कूटनीतिक प्रयासों के वैश्विक संबंधों को नुकसान पहुंचा रही है। ट्रम्प के पूर्व सहयोगी जॉन बोल्टन ने भी इस नीति को विडंबनापूर्ण बताया, क्योंकि यह भारत को रूस और चीन के करीब ले जा सकती है। विशेषज्ञ क्रिस्टोफर पडिला और अर्थशास्त्री जेफ्री सैक्स ने भी इस कदम को अमेरिका की विश्वसनीयता के लिए खतरा बताया।


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