Newzfatafatlogo

डेनमार्क ने ट्रम्प की ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी का दिया कड़ा जवाब

डेनमार्क ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी का कड़ा जवाब दिया है। डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई विदेशी शक्ति उनके क्षेत्र पर हमला करती है, तो उनके सैनिक बिना आदेश के तुरंत कार्रवाई करेंगे। ग्रीनलैंड, जो पिछले 300 वर्षों से डेनमार्क का हिस्सा है, पर अमेरिकी कब्जे का विरोध भी किया गया है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है और ट्रम्प की योजनाओं का क्या असर हो सकता है।
 | 
डेनमार्क ने ट्रम्प की ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी का दिया कड़ा जवाब

डेनमार्क का स्पष्ट संदेश


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी के जवाब में, डेनमार्क ने एक सख्त प्रतिक्रिया दी है। यह चेतावनी उस समय आई है जब अमेरिका ने ग्रीनलैंड को खरीदने या उस पर कब्जा करने की बात की है। ग्रीनलैंड, जो अटलांटिक महासागर में स्थित है, पिछले 300 वर्षों से डेनमार्क का हिस्सा है और इसकी विदेश एवं रक्षा नीति भी डेनमार्क द्वारा संचालित होती है।


सैनिकों को बिना आदेश कार्रवाई का अधिकार

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, डेनमार्क के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई विदेशी शक्ति उनके क्षेत्र पर हमला करती है, तो उनके सैनिक बिना किसी आदेश का इंतजार किए तुरंत जवाब देंगे। यह नियम 1952 से लागू है, जब डेनमार्क ने अपने सैनिकों के लिए यह निर्देश जारी किया था कि विदेशी आक्रमण की स्थिति में उन्हें तुरंत कार्रवाई करनी होगी।


इतिहास में पहली बार लागू हुआ नियम

यह नियम पहली बार 1940 में लागू हुआ था, जब जर्मनी ने डेनमार्क पर आक्रमण किया था। उस समय संचार प्रणाली ठप हो गई थी, जिससे सैनिकों को स्थिति का सही अंदाजा नहीं था। रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि यह नियम आज भी प्रभावी है।


अमेरिकी कब्जे का विरोध

पिछले वर्ष किए गए एक सर्वेक्षण में 85 प्रतिशत लोगों ने अमेरिकी कब्जे का विरोध किया था। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने बार-बार कहा है कि उनका देश बिकाऊ नहीं है। 1951 का रक्षा समझौता 2004 में अपडेट किया गया था, जिसमें ग्रीनलैंड की सेमी-ऑटोनॉमस सरकार को शामिल किया गया।


ट्रम्प की खरीदारी की योजना

व्हाइट हाउस में विचार किया जा रहा है कि ग्रीनलैंड के नागरिकों को प्रति व्यक्ति 10 हजार से 1 लाख डॉलर तक का भुगतान कर उन्हें अमेरिका में शामिल होने के लिए राजी किया जाए। इस योजना को एक व्यापारिक सौदे के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, यदि यह योजना लागू होती है, तो इसकी कुल लागत लगभग 5 से 6 अरब डॉलर हो सकती है।


डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने प्रस्ताव खारिज किया

अधिकारियों के अनुसार, ग्रीनलैंड को अमेरिका से जोड़ने के लिए पैसे का प्रस्ताव केवल एक विकल्प है। इसके अलावा कूटनीतिक समझौतों और सैन्य बल के इस्तेमाल जैसे विकल्पों पर भी विचार किया गया है। ग्रीनलैंड एक रणनीतिक क्षेत्र है और अमेरिका की रुचि इसमें नई नहीं है।


ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर ट्रम्प की चिंता

ट्रम्प का कहना है कि ग्रीनलैंड अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, खासकर रूसी और चीनी जहाजों की मौजूदगी के कारण। उन्होंने कहा कि केवल संधि या लीज से काम नहीं चलेगा, बल्कि पूर्ण नियंत्रण आवश्यक है।


व्हाइट हाउस की रणनीतियाँ

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलीन लेविट ने कहा कि उनकी टीम ग्रीनलैंड पर नियंत्रण के कई तरीकों की तलाश कर रही है, जिसमें सैन्य बल का इस्तेमाल भी शामिल है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने चेतावनी दी है कि यदि ग्रीनलैंड की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो अमेरिका को कुछ कदम उठाने पड़ सकते हैं।