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डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय में करोड़ों का टेंडर घोटाला: जांच की मांग

लखनऊ में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय में करोड़ों रुपये के टेंडर घोटाले का मामला सामने आया है। भाजपा विधायक अजय सिंह ने मुख्यमंत्री से जांच की मांग की है। आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत से अपात्र फर्म को टेंडर आवंटित किया गया। इस मामले की जांच के लिए अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और क्या है इसके पीछे की कहानी।
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डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय में करोड़ों का टेंडर घोटाला: जांच की मांग

लखनऊ में टेंडर घोटाले का खुलासा


लखनऊ। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय में करोड़ों रुपये के टेंडर घोटाले का मामला अब सामने आ रहा है। अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर इस घोटाले को अंजाम दिया गया है। भाजपा विधायक अजय सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इस मामले की जांच की मांग की है। इस पत्र के आधार पर अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद ने प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।


भ्रष्टाचार के आरोप

भाजपा विधायक ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में उल्लेख किया है कि AKTU विश्वविद्यालय के टेंडर संख्या GeMBid GEM\2025\B\6168972 (12.29 करोड़) में भ्रष्टाचार किया गया है। इसमें अपात्र फर्म क्रियेटिव लैबस, अम्बाला को टेंडर आवंटित किया गया है। टेंडर के टर्नओवर में वित्तीय वर्ष की गलत व्याख्या की गई है। इसके अलावा, जो फर्म L-2 और L-3 घोषित की गई हैं, उनके दस्तावेजों में जालसाजी की आशंका है।


कोर्ट में मामला विचाराधीन

मेसर्स यूनिवर्सल इंजीनियरिंग इक्विपमेंट कॉर्पोरेशन ने हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है। हालांकि, इस मामले के कोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद क्रियेटिव लैबस को टेंडर आवंटित कर दिया गया है। विधायक ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि इस धांधली और भ्रष्टाचार की जांच कराकर दोषियों को दंडित किया जाए।


अनियमितताओं का खुलासा

मानकों की अनदेखी
बता दें कि, Dr.APJ Abdul Kalam Technical University में टेंडर संख्या: GEM/2025/B/6168972 निकाली गई थी। इसके बाद कई अनियमितताएं सामने आईं। मानकों की अनदेखी करते हुए लगभग ₹12.29 करोड़ का कार्यादेश जारी किया गया। जब यह मामला उजागर हुआ, तो इसकी शिकायतें शुरू हुईं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे नजरअंदाज किया। यह मामला लखनऊ हाईकोर्ट तक पहुंच गया है, जो अभी विचाराधीन है।


अधिकारियों की मिलीभगत

भ्रष्टाचार का पूरा मामला
इस टेंडर प्रक्रिया में अधिकारियों की मिलीभगत स्पष्ट है। अधिकारियों ने अपने करीबी कंपनियों को टेंडर में शामिल किया और कई कमियों के बावजूद ₹12.29 करोड़ का टेंडर उन्हें दिला दिया। यदि इस मामले की जांच की जाए, तो भ्रष्टाचार का पूरा मामला उजागर हो सकता है।