Newzfatafatlogo

डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती: एक महत्वपूर्ण अवकाश

14 अप्रैल 2026 को डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती मनाई जाएगी, जिसे केंद्र सरकार ने गजेटेड हॉलिडे घोषित किया है। इस दिन देशभर में बैंक, स्कूल और सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे। यह दिन केवल छुट्टी नहीं है, बल्कि अंबेडकर के योगदान और उनके विचारों को याद करने का अवसर है। जानें इस दिन का महत्व और बाबासाहेब का जीवन संघर्ष।
 | 
डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती: एक महत्वपूर्ण अवकाश

डॉ. अंबेडकर की जयंती का महत्व


नई दिल्ली: आज, 14 अप्रैल 2026 को, पूरे देश में अवकाश रहेगा क्योंकि यह डॉ भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती है। केंद्र सरकार ने इस दिन को गजेटेड हॉलिडे घोषित किया है, जिसके कारण बैंक, स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक के हॉलिडे कैलेंडर में भी इस दिन को शामिल किया गया है, जिससे अधिकांश बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होंगी।


यह दिन केवल एक छुट्टी नहीं है, बल्कि यह हमारे संविधान निर्माता और सामाजिक न्याय के प्रतीक को सम्मान देने का अवसर है। 14 अप्रैल का महत्व केवल एक तारीख तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के सामाजिक और ऐतिहासिक परिवर्तन का प्रतीक है। डॉ अंबेडकर ने अपने जीवन में भेदभाव और कठिनाइयों का सामना करते हुए शिक्षा और संघर्ष के माध्यम से समाज को नई दिशा दी।


बाबासाहेब का योगदान

उन्होंने न केवल भारतीय संविधान का निर्माण किया, बल्कि समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को अधिकार दिलाने के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार किया। आज भी जब समानता और अधिकारों की बात होती है, तो उनका नाम सबसे पहले लिया जाता है।


इस वर्ष, 2026 में, यह दिन मंगलवार को पड़ रहा है, जिससे लोगों को एक अतिरिक्त छुट्टी का लाभ मिलेगा। लेकिन इस दिन की असली अहमियत केवल छुट्टी तक सीमित नहीं है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि शिक्षा, समानता और अधिकारों की लड़ाई अभी भी जारी है।


देशभर में इस दिन कई कार्यक्रम, रैलियां और सांस्कृतिक आयोजन किए जाते हैं, जहां लोग अंबेडकर के विचारों को याद करते हैं और उन्हें आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हैं।


बाबासाहेब का जन्म और शिक्षा

डॉ अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। बचपन में उन्हें सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और देश के सबसे बड़े विधि विशेषज्ञों में से एक बने। कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई कर उन्होंने यह साबित किया कि शिक्षा ही सबसे बड़ी ताकत है।


भारतीय संविधान के निर्माण में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वे ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन थे और संविधान को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से मौलिक अधिकार, समानता और आरक्षण जैसी व्यवस्थाएं लागू हो सकीं। यही कारण है कि 14 अप्रैल का दिन केवल छुट्टी नहीं, बल्कि आत्ममंथन और प्रेरणा का दिन भी माना जाता है।