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डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती: सामाजिक समानता के लिए संघर्ष का उत्सव

आज, 14 अप्रैल को, देशभर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती मनाई जा रही है। विभिन्न कार्यक्रमों में उनके योगदान को याद किया जा रहा है, जिसमें दिल्ली और नोएडा में बड़े आयोजन शामिल हैं। नेताओं ने अंबेडकर के आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया है। जानें उनके संघर्ष और सामाजिक समानता के लिए किए गए कार्यों के बारे में।
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डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती: सामाजिक समानता के लिए संघर्ष का उत्सव

डॉ. अंबेडकर की जयंती का उत्सव

आज (14 अप्रैल) देशभर में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती मनाई जा रही है। हर साल की तरह, इस बार भी विभिन्न सरकारी और राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। दिल्ली समेत कई शहरों में लोगों ने अंबेडकर की प्रतिमाओं पर फूल चढ़ाए और उनके विचारों को याद किया। बसपा की नेता मायावती लखनऊ में एक विशाल रैली को संबोधित करेंगी।


दिल्ली और नोएडा में कार्यक्रम

अंबेडकर जयंती के अवसर पर मंगलवार को दिल्ली और नोएडा में बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ये कार्यक्रम दलित प्रेरणा स्थल पर होंगे, जिसके कारण दोनों शहरों में शाम तक भारी ट्रैफिक जाम की संभावना है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और गौतमबुद्धनगर ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी है।


सामाजिक समानता के लिए संघर्ष

नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने डॉ. अंबेडकर के योगदान को देश के लिए अनमोल बताते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सामाजिक समानता के लिए जीवनभर संघर्ष किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर अंबेडकर को श्रद्धांजलि दी और उनके आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया। विपक्षी नेताओं ने भी उनके विचारों को आज के संदर्भ में प्रासंगिक बताया।


एक महान अर्थशास्त्री और कानूनविद

भारतीय संविधान के निर्माता डॉ. अंबेडकर एक महान अर्थशास्त्री, कानूनविद और समाज सुधारक थे। संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने देश का संविधान तैयार किया। संविधान के माध्यम से उन्होंने हर नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार दिलाया।


जाति प्रथा के खिलाफ आंदोलन

डॉ. अंबेडकर ने जाति प्रथा और छुआछूत के खिलाफ देशभर में बड़ा आंदोलन चलाया। उन्होंने अछूतों को सार्वजनिक तालाबों से पानी पीने का अधिकार दिलाने के लिए महाड़ सत्याग्रह किया। इसके अलावा, उन्होंने दलितों की शिक्षा और उत्थान के लिए बहिष्कृत हितकारिणी सभा की स्थापना की।