डोनाल्ड ट्रंप का चीन दौरा: व्यापार समझौतों की घोषणा और शी जिनपिंग की प्रतिक्रिया
ट्रंप का सफल चीन दौरा
नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीन दिवसीय चीन यात्रा के बाद अमेरिका लौटने की घोषणा की है। उन्होंने इस दौरे को अत्यंत सफल बताया और कहा कि 'शानदार व्यापार समझौते' हुए हैं। हालांकि, उन्होंने इन समझौतों के विवरण साझा नहीं किए। बातचीत के दौरान, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका को एक पतनशील देश के रूप में वर्णित किया। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा कि शी का यह बयान जो बाइडेन के कार्यकाल के अमेरिका के संदर्भ में था। इसके अलावा, ट्रंप ने यह भी बताया कि शी जिनपिंग 24 सितंबर को अमेरिका का दौरा करेंगे।
बीजिंग में अंतिम वार्ता
ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच अंतिम बातचीत शुक्रवार, 15 मई को हुई, जो बीजिंग के झोंगनानहाई परिसर में आयोजित की गई। यह स्थान चीन के शीर्ष नेतृत्व का सबसे सुरक्षित और गोपनीय केंद्र माना जाता है। बैठक के बाद, ट्रंप ने कहा कि चीन के साथ शानदार व्यापार समझौते हुए हैं, जो दोनों देशों के लिए लाभकारी होंगे।
विशेष विदाई
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, 'हमने कुछ अद्भुत समझौते किए हैं, जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद हैं।' हालांकि, उन्होंने इन समझौतों के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी। अमेरिका लौटते समय, ट्रंप को बीजिंग कैपिटल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने उन्हें एयरपोर्ट तक छोड़ने का कार्य किया। ट्रंप को विदाई देने के लिए स्कूल के बच्चों ने अमेरिकी और चीनी झंडे लहराए। विमान की सीढ़ियों पर चढ़ते समय, ट्रंप ने मुड़कर हाथ भी हिलाया।
ऐतिहासिक दौरा
शी जिनपिंग ने ट्रंप के साथ बयान में कहा कि यह दौरा ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा, 'इस दौरान हमारे दोनों देशों के बीच एक नया और सकारात्मक रणनीतिक रिश्ता स्थापित हुआ है। इसे एक माइलस्टोन घटना कहा जा सकता है।' ट्रंप ने ईरान मुद्दे पर अपनी और शी जिनपिंग की सोच में समानता व्यक्त की, लेकिन शी ने सार्वजनिक रूप से ईरान संघर्ष का उल्लेख नहीं किया।
ताइवान का समर्थन
ताइवान के विदेश मंत्री लिन चिया-लुंग ने अमेरिका का समर्थन जारी रखने के लिए धन्यवाद दिया है। न्यूज एजेंसी AP के अनुसार, उन्होंने कहा कि अमेरिका ताइवान स्ट्रेट में शांति और स्थिरता को महत्व देता है। यह बयान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के उस बयान के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ताइवान के मामले में अमेरिका की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है।
