डोनाल्ड ट्रंप का नाटो से बाहर होने का इरादा, अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल
ट्रंप का नाटो पर गंभीर विचार
वॉशिंगटन- अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन) से अलग होने के संकेत दिए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है। एक हालिया इंटरव्यू में, ट्रंप ने कहा कि वह नाटो की सदस्यता पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं और ईरान से जुड़े मौजूदा तनाव के समाप्त होने के बाद इस पर अंतिम निर्णय लेंगे।
ट्रंप का नाटो पर हमला
ब्रिटिश समाचार पत्र डेली टेलीग्राफ को दिए गए इंटरव्यू में, ट्रंप ने नाटो को 'कागजी शेर' करार दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें यह संगठन कभी प्रभावी नहीं लगा और अब इसे छोड़ने का विकल्प उनके सामने गंभीरता से मौजूद है।
यूक्रेन और ईरान संकट पर ट्रंप की टिप्पणी
‘यूक्रेन में साथ, लेकिन ईरान में अकेले’
ट्रंप ने आरोप लगाया कि यूक्रेन युद्ध के दौरान अमेरिका ने यूरोपीय देशों का भरपूर समर्थन किया, जबकि वर्तमान ईरान संकट में वही देश अमेरिका से दूरी बना रहे हैं। उन्होंने कहा, “यूक्रेन का युद्ध अमेरिका का नहीं था, फिर भी हमने सहयोग किया। लेकिन जब हमारी बारी आई तो सहयोगी देश पीछे हट गए।” इस दौरान उन्होंने व्लादिमीर पुतिन का जिक्र करते हुए कहा कि रूस भी नाटो की वास्तविक क्षमता को समझता है, इसलिए वह इसे गंभीरता से नहीं लेता।
ब्रिटेन की स्थिति
ब्रिटेन पर भी साधा निशाना
ट्रंप ने कीर स्टार्मर पर भी टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने कहा कि ब्रिटेन की नौसेना कमजोर हो चुकी है और सरकार केवल ऊर्जा बचत पर ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि अब वह ब्रिटेन को कोई सलाह देने के इच्छुक नहीं हैं।
ब्रिटेन का रुख
ब्रिटेन का रुख—‘यह हमारा युद्ध नहीं’
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि ईरान से जुड़ा संघर्ष उनका युद्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता अपने देश के नागरिकों की सुरक्षा है और वे उन्हें किसी ऐसे संघर्ष में शामिल नहीं करना चाहते, जिससे ब्रिटेन का सीधा संबंध नहीं है।
यूरोपीय देशों की दूरी
यूरोपीय देशों ने भी बनाई दूरी
नाटो के अन्य प्रमुख सदस्य—फ्रांस, जर्मनी और इटली—भी इस मुद्दे पर अमेरिका से अलग रुख अपनाते नजर आ रहे हैं। इन देशों ने इस संघर्ष को इजराइल से जुड़ा बताते हुए सीधे तौर पर इसमें शामिल होने से परहेज किया है।
नाटो की एकजुटता पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने नाटो की एकजुटता और अमेरिका-यूरोप संबंधों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में ट्रंप का अंतिम फैसला वैश्विक सुरक्षा संतुलन पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
