डोनाल्ड ट्रंप के बयानबाजी से भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव
भारत और अमेरिका के रिश्तों में बदलाव
डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान भारत और अमेरिका के बीच संबंध काफी मजबूत थे। उम्मीद थी कि उनका दूसरा कार्यकाल भी इसी तरह का होगा। 10 मई 2025 को सब कुछ सामान्य था, लेकिन तभी ट्रंप ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम का दावा किया। इसके बाद विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप के दावे को खारिज कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रात में देश को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तान की मांग पर युद्धविराम का निर्णय लिया गया है, जिसमें किसी तीसरे देश का हस्तक्षेप नहीं था।
ट्रंप की विवादास्पद टिप्पणियाँ
इसके बाद ट्रंप ने भारत के खिलाफ बयानबाजी तेज कर दी। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर पर कई बार भ्रामक बातें कीं और 40 से अधिक बार युद्धविराम का दावा किया। ट्रंप ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर की तारीफ करके भारत को असहज करने का कोई मौका नहीं छोड़ा।
ट्रंप की आपत्तिजनक टिप्पणी
ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने चीन और भारत को धरती पर 'नरक' कहा। यह टिप्पणी अमेरिका के एक लेखक द्वारा की गई थी, जिसे ट्रंप ने साझा किया, जिससे उनकी घटिया सोच उजागर हुई।
विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
ट्रंप की इस आपत्तिजनक टिप्पणी पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'हमने कुछ रिपोर्टें देखी हैं...बस इतना ही कहना चाहूंगा।' इस ठंडी प्रतिक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या इसी कारण ट्रंप और भी मनबढ़ हो रहे हैं।
ईरान का समर्थन
ट्रंप की टिप्पणी पर ईरान ने भारत का समर्थन किया। हैदराबाद स्थित ईरानी कॉन्सुलेट ने एक पोस्ट में लिखा, 'चीन और भारत सभ्यता के प्रमुख उद्गम स्थल रहे हैं।' इस पर विपक्षी दलों ने भी मोदी सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए।
भारत के लिए चुनौतियाँ
ट्रंप का रवैया भारत के लिए चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने भारत पर कई बार दबाव डाला और टैरिफ मामलों में दुश्मन जैसा व्यवहार किया। भारत को रूस के खिलाफ भी दबाव का सामना करना पड़ा।
भारत का संयम
भारत की नजर 2048 पर है, जब वह एक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखता है। मोदी सरकार का मानना है कि संयम बरतने से आर्थिक विकास में बाधा नहीं आएगी।
