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तंजानिया की रहस्यमयी झील: खतरनाक लाल पानी का रहस्य

लेक नैट्रॉन, उत्तरी तंजानिया में स्थित एक रहस्यमयी झील है, जिसका पानी जीवों के लिए अत्यंत घातक है। इसका पीएच स्तर 10.5 तक पहुंच सकता है और तापमान 40 से 60 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। यहां के अद्भुत रासायनिक गुणों के कारण, झील का पानी गहरा लाल या गुलाबी रंग का दिखाई देता है। इसके बावजूद, यहां कुछ जीव पनपते हैं, जैसे हलोअर्चिअल सूक्ष्म जीव और लेसर फ्लेमिंगो। जानें इस अनोखी झील के बारे में और इसके रहस्यों को।
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तंजानिया की रहस्यमयी झील: खतरनाक लाल पानी का रहस्य

लेक नैट्रॉन: एक अद्भुत और खतरनाक झील

नई दिल्ली: दुनिया में कई रहस्यमयी झीलें हैं, जिनमें से एक है लेक नैट्रॉन, जो उत्तरी तंजानिया में स्थित है। इस झील के किनारे जाने की हिम्मत बहुत कम लोग करते हैं, क्योंकि यहां का पानी अधिकांश जीवों के लिए अत्यंत घातक है।


लेक नैट्रॉन का पानी अत्यधिक गर्म, खारा और क्षारीय है। इसका पीएच स्तर 10.5 तक पहुंच सकता है, जो सामान्य जल से कई गुना अधिक तेजाबी है। यहां का तापमान अक्सर 40 से 60 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। यदि कोई जानवर इसमें गिरता है, तो वह कुछ ही समय में मर जाता है और उसकी लाशें खनिजों से ढककर पत्थर जैसी हो जाती हैं।


अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के लैंडसेट 8 सैटेलाइट द्वारा ली गई तस्वीरों में यह झील बेहद खूबसूरत नजर आती है। इन तस्वीरों में झील का पानी गहरा लाल या गुलाबी रंग का दिखाई देता है। ये तस्वीरें मार्च 2017 की हैं, जब बारिश का मौसम शुरू हो रहा था।


नैट्रॉन की अनोखी रासायनिक संरचना आसपास की ज्वालामुखी गतिविधियों के कारण है। झील से लगभग 20 किलोमीटर दूर ओआई डोइनो लेनगई ज्वालामुखी सोडियम कार्बोनेट से भरपूर लावा निकालता है, जो भूमिगत दरारों के माध्यम से गर्म झरनों के रूप में झील में पहुंचता है। कम बारिश और अधिक वाष्पीकरण के कारण पानी और गाढ़ा होता जाता है।


हालांकि, इस झील में जीवन का एक अनोखा संतुलन देखने को मिलता है। इतनी कठोर परिस्थितियों के बावजूद, यहां कुछ जीव पनपते हैं। पानी में हलोअर्चिअल नामक सूक्ष्म जीव बड़ी संख्या में रहते हैं, जो झील को लाल और गुलाबी रंग देते हैं। सबसे खास बात यह है कि झील के आसपास लेसर फ्लेमिंगो पक्षी बड़े पैमाने पर घोंसला बनाते हैं। पूर्वी अफ्रीका के लगभग 75 प्रतिशत लेजर फ्लेमिंगो का जन्म इसी झील के आसपास होता है। ये पक्षी झील के खारे पानी में पनपने वाले सूक्ष्म जीवों को खाते हैं और यहां शिकारियों से सुरक्षित रह पाते हैं।