तमिलनाडु में कांग्रेस और DMK के बीच गठबंधन खत्म, संसद में बदलाव की मांग
कांग्रेस और DMK के बीच संबंधों में बदलाव
तमिलनाडु में कांग्रेस के तमिलागा वेट्री कझगम (TVK) के साथ जुड़ने का प्रभाव अब संसद में भी देखने को मिल रहा है। द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK), जो कांग्रेस की सहयोगी रही है, ने लोकसभा स्पीकर से अनुरोध किया है कि उसके सांसदों को अब अलग बिठाया जाए। DMK का कहना है कि कांग्रेस के साथ उसका गठबंधन समाप्त हो चुका है, इसलिए उसके सांसदों को कांग्रेस के सांसदों के साथ नहीं बैठना चाहिए। इस कदम से यह स्पष्ट होता है कि DMK ने केंद्र में कांग्रेस के साथ अपने गठबंधन को समाप्त करने का संकेत दिया है.
कांग्रेस का समर्थन और चुनावी रणनीति
कांग्रेस ने पहले एक पत्र जारी किया था जिसमें कहा गया था कि TVK ने उससे समर्थन मांगा है और वह उसके साथ चुनावी सहयोग के लिए तैयार है। कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि पेरियार और आंबेडकर के सिद्धांतों के आधार पर दोनों दल तमिलनाडु में आगामी चुनावों में एक साथ लड़ेंगे। यह ध्यान देने योग्य है कि DMK और कांग्रेस ने पहले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में एक साथ भाग लिया है, और हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भी उनका गठबंधन था, जिसमें कांग्रेस ने पांच सीटें जीती थीं.
DMK की चिट्ठी और संसद की स्थिति
DMK की नेता और सांसद कनिमोई ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने सांसदों की बैठने की व्यवस्था में बदलाव की मांग की है। पत्र में कहा गया है, 'हमारा कांग्रेस के साथ गठबंधन समाप्त हो गया है, इसलिए सदन में हमारे सांसदों का कांग्रेस के सांसदों के साथ बैठना उचित नहीं होगा।' DMK लोकसभा में पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी है, जिसके पास 22 सांसद हैं। पहले, DMK और कांग्रेस के सांसद एक साथ बैठते थे, लेकिन अब DMK के अनुरोध के अनुसार, सांसदों की बैठने की व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है.
राजनीतिक स्थिति और भविष्य की योजनाएं
तमिलनाडु में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने के कारण राजनीतिक स्थिति जटिल हो गई है। TVK ने 108 सीटों पर जीत हासिल की है, जिसके बाद कांग्रेस ने समर्थन का ऐलान किया है। कांग्रेस ने यह भी कहा है कि दोनों दल आगामी निकाय चुनाव, लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में भी एक साथ लड़ेंगे। इससे यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस और DMK की राजनीतिक राहें अब अलग हो गई हैं.
