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तमिलनाडु में ‘वंदे मातरम’ का गायन, पश्चिम बंगाल में अनुपस्थित

हाल ही में तमिलनाडु में एक सरकारी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ का गायन किया गया, जबकि पश्चिम बंगाल में ऐसा नहीं हुआ। यह विरोधाभास तब और बढ़ गया जब पश्चिम बंगाल में भाजपा के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के शपथ समारोह में ‘वंदे मातरम’ गायन से वंचित रहा। जानें इस दिलचस्प स्थिति के पीछे की कहानी और इसके राजनीतिक महत्व को।
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तमिलनाडु में ‘वंदे मातरम’ का गायन, पश्चिम बंगाल में अनुपस्थित

विरोधाभास का दृश्य

एक दिलचस्प विरोधाभास सामने आया है। तमिलनाडु में एक सरकारी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ गाया गया, जबकि पश्चिम बंगाल में इसका गायन नहीं हुआ। रविवार, 10 मई को टीवीके नेता विजय ने शपथ ली, और उनके शपथ समारोह की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ के गायन से हुई। नए प्रोटोकॉल के अनुसार, सभी छह अंतरे गाए गए। इसके बाद राष्ट्रगान बजाया गया और फिर तमिलनाडु का राज्य गीत गाया गया। विजय और उनके नौ मंत्रियों की शपथ के बाद भी इसी क्रम का पालन किया गया, जिसमें पहले ‘वंदे मातरम’, फिर ‘जन गण मन’ और अंत में ‘तमिल थाई वाजथु’ बजाया गया।


पश्चिम बंगाल में गायन की अनुपस्थिति

विरोधाभास इस कारण से है कि एक दिन पहले, 9 मई को कोलकाता में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शपथ ली, लेकिन उस कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ का गायन नहीं हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से हुई और समापन भी उसी से हुआ। यह ध्यान देने योग्य है कि ‘वंदे मातरम’ के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी बंगाल के थे। इस वर्ष केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम’ के डेढ़ सौ साल पूरे होने पर संसद में विशेष चर्चा आयोजित की और इसके लिए प्रोटोकॉल निर्धारित किया। इसे राष्ट्रगान की तरह सम्मान देने का निर्णय लिया गया, लेकिन ‘वंदे मातरम’ के रचयिता की भूमि पर इसका गायन नहीं हुआ। दूसरी ओर, तमिलनाडु में एक समारोह में दो बार इसका गायन किया गया।