तमिलनाडु विधानसभा में विजय सरकार ने विश्वास मत जीतकर 144 विधायकों का समर्थन प्राप्त किया
विधानसभा में विश्वास मत की प्रक्रिया
चेन्नई - तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विश्वास मत हासिल किया। इस प्रक्रिया में उन्हें 144 विधायकों का समर्थन मिला, जबकि विपक्ष में केवल 22 वोट पड़े।
राजनीतिक ड्रामा और विपक्ष का वॉकआउट
इस दौरान, विधानसभा में राजनीतिक नाटक का दृश्य देखने को मिला। विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके ने सदन से वॉकआउट किया। स्टालिन ने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सत्ताधारी गठबंधन के पास 234 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए आवश्यक 118 सदस्य नहीं हैं।
उदयनिधि स्टालिन के आरोप
सदन में स्टालिन ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जीतने का भरोसा न होने के कारण दो सीटों से चुनाव लड़ा और बाद में एक सीट से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने यह भी बताया कि मद्रास हाईकोर्ट ने तिरुपत्तूर के विधायक को विश्वास मत की प्रक्रिया में भाग लेने से रोका था, जिससे सत्ताधारी पक्ष की संख्या कम हो गई।
सरकार की कार्यशैली पर सवाल
डीएमके नेता ने नई सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए, आरोप लगाते हुए कहा कि यह शासन-प्रशासन के बजाय अपनी छवि को चमकाने में अधिक रुचि रखती है। उन्होंने कहा कि शासन के वास्तविक कार्यों के बजाय इंस्टाग्राम रील्स के माध्यम से शासन करने का प्रयास किया जा रहा है।
एआईएडीएमके का विरोध
वहीं, एआईएडीएमके के महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री ए पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री द्वारा बागी विधायकों से मुलाकात को लेकर सवाल उठाए और विश्वास प्रस्ताव का विरोध करने की बात कही। हालांकि, एसपी वेलुमणि के नेतृत्व वाले गुट ने विश्वास प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया।
नीट-यूजी 2026 परीक्षा का मुद्दा
इस बहस के दौरान, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द किए जाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।
