तेलंगाना की राजनीति में KTR का विवादास्पद बयान: क्या राहुल गांधी को मिलेगी फांसी?
तेलंगाना में राजनीतिक विवाद
हैदराबाद: तेलंगाना की राजनीतिक स्थिति में एक बार फिर से गर्मागर्मी बढ़ गई है। भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मंत्री के टी रामाराव (KTR) ने कांग्रेस के नेताओं पर तीखा हमला किया है। उन्होंने राहुल गांधी और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को अधूरे चुनावी वादों के लिए कठोर शब्दों में आलोचना की। KTR का यह बयान काफी विवादास्पद बन गया है, जिसमें उन्होंने फांसी जैसी सजा की बात की है।
KTR के बयान की मुख्य बातें
KTR ने एक कार्यक्रम में कहा कि कांग्रेस ने चुनाव से पहले जनता से कई बड़े वादे किए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें पूरा नहीं किया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “राहुल गांधी को अशोक नगर चौराहे पर फांसी देनी चाहिए, क्योंकि उन्होंने 2 लाख नौकरियां देने का वादा किया था जो पूरा नहीं हुआ। किसानों की कर्ज माफी के वादे के लिए वारंगल में फांसी होनी चाहिए। वहीं, पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने के वादे पर राहुल गांधी और रेवंत रेड्डी को कमारेड्डी में फांसी दी जानी चाहिए।”
KTR ने आगे कहा कि यदि हर झूठे वादे के लिए सजा दी जाए तो कांग्रेस नेताओं को सैकड़ों बार फांसी होनी पड़ेगी। उन्होंने कांग्रेस को '420 पार्टी' करार दिया, जिसका अर्थ धोखाधड़ी है। यह बयान मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के एक पुराने बयान के जवाब में था, जिसमें उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री केसीआर पर तीखी टिप्पणी की थी।
बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया
KTR के इस बयान ने राज्य में राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। कांग्रेस नेताओं ने इसे गैर-जिम्मेदाराना और खतरनाक बताया है। कई नेताओं का कहना है कि ऐसे शब्द लोकतंत्र के लिए उचित नहीं हैं। सोशल मीडिया पर भी इस बयान की काफी चर्चा हो रही है। कुछ लोग KTR की बात से सहमत हैं, जबकि अन्य इसे हिंसा भड़काने वाला बयान मानते हैं।
कांग्रेस के चुनावी वादे
तेलंगाना विधानसभा चुनाव 2023 में कांग्रेस ने कई बड़े वादे किए थे, जैसे 2 लाख नौकरियां देना, किसानों का कर्ज माफ करना और पिछड़े वर्गों को अधिक आरक्षण देना। कांग्रेस ने बीआरएस को हराकर सत्ता हासिल की, लेकिन विपक्ष का कहना है कि ये वादे अब तक पूरे नहीं हुए। KTR ने इसी मुद्दे को उठाकर कांग्रेस पर हमला किया।
इससे पहले भी KTR ने रेवंत रेड्डी पर निशाना साधा था, उन पर आरोप लगाया था कि वे बुनियादी मुद्दों को भी नहीं समझते, जैसे नदी जल बंटवारे या परियोजनाओं की जानकारी। विधानसभा में चल रही बहस के दौरान भी दोनों पार्टियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई है।
