तेलंगाना में आवारा कुत्तों की हत्या: पशु अधिकार कार्यकर्ताओं की चिंता बढ़ी
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बीच shocking घटना
तेलंगाना से आई एक चौंकाने वाली खबर ने सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान पूरे देश को हिला दिया है। कामारेड्डी और हमनकोंडा जिलों में केवल सात दिनों के भीतर लगभग 500 आवारा कुत्तों की हत्या की गई है। पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह सामूहिक हत्या पंचायत चुनावों में किए गए वादों को पूरा करने के लिए की गई है। इस मामले ने प्रशासन, राजनीति और समाज की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
एक हफ्ते में 500 कुत्तों की मौत
कामारेड्डी जिले के माचारेड्डी थाना क्षेत्र में स्थित भावनीपेट, पलवांचा, फरीदपेट, वाड़ी और बंदारमेश्वरापल्ली गांवों में हाल ही में लगभग 200 आवारा कुत्तों की हत्या की गई है। इसके अलावा, हमनकोंडा जिले के शायमपेट और अरेपल्ली गांवों में भी लगभग 300 कुत्तों के मारे जाने का आरोप है। इन घटनाओं की संख्या और गति ने स्थानीय निवासियों और पशु प्रेमियों को चौंका दिया है.
एनिमल एक्टिविस्ट की शिकायत
12 जनवरी 2026 को, स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन ऑफ इंडिया से जुड़े अदुलापुरम गौतम ने माचारेड्डी थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि गांवों में आवारा कुत्तों को जहरीले इंजेक्शन देकर मारा गया। शिकायत में कहा गया है कि यह सब सुनियोजित तरीके से किया गया और इसमें कुछ गांवों के सरपंचों की भूमिका है। पुलिस ने शिकायत की पुष्टि करते हुए जांच शुरू करने का आश्वासन दिया है.
सरपंचों पर गंभीर आरोप
शिकायत में पांच गांवों के सरपंचों के नाम शामिल हैं। इसके अलावा, किशोर पांडेय नामक एक व्यक्ति पर कुत्तों की हत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। गौतम का कहना है कि उन्होंने स्वयं भावनीपेट गांव में येल्लम्मा मंदिर के पीछे कुत्तों के शव देखे। अन्य गांवों में भी इसी तरह की घटनाओं की पुष्टि हुई है, जिससे आरोप और गंभीर हो गए हैं.
चुनावी वादों से जुड़ा मामला
स्थानीय निवासियों का कहना है कि हाल ही में हुए पंचायत चुनावों के दौरान कई उम्मीदवारों ने आवारा कुत्तों की समस्या को समाप्त करने का वादा किया था। आरोप है कि चुनाव जीतने के बाद कुछ प्रतिनिधियों ने इस समस्या का समाधान मानवीय तरीके से करने के बजाय कुत्तों की हत्या का रास्ता अपनाया। हमनकोंडा जिले में दर्ज मामलों में दो महिला सरपंचों और उनके पतियों समेत नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है.
पशु अधिकार संगठनों ने उठाए सवाल
पशु अधिकार संगठनों ने इस घटना को पशु क्रूरता कानूनों का उल्लंघन बताया है। उनका कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान नसबंदी और टीकाकरण जैसे कानूनी उपायों से किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच इस तरह की घटनाएं प्रशासनिक विफलता को उजागर करती हैं। अब यह देखना है कि दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा.
