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तेलंगाना में बुजुर्गों की देखभाल के लिए सख्त कानून लागू

तेलंगाना सरकार ने बुजुर्गों की देखभाल को सुनिश्चित करने के लिए एक नया और सख्त कानून लागू किया है। इस कानून के तहत, यदि कोई कर्मचारी अपने माता-पिता को बेसहारा छोड़ता है, तो उसके वेतन से 15% की कटौती की जाएगी। यह नियम सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों के कर्मचारियों पर लागू होगा। इसके अलावा, सौतेले माता-पिता को भी अधिकार दिए गए हैं। शिकायत करने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, जिससे बुजुर्गों को 60 दिनों के भीतर न्याय मिल सकेगा। इस कानून का उद्देश्य समाज में बुजुर्गों की उपेक्षा को रोकना है।
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तेलंगाना में बुजुर्गों की देखभाल के लिए सख्त कानून लागू

बुजुर्गों की देखभाल के लिए नया कानून

हैदराबाद: यदि आप नौकरीपेशा हैं और अपने वृद्ध माता-पिता की देखभाल से बचते हैं, तो यह खबर आपके लिए एक गंभीर चेतावनी है। तेलंगाना सरकार ने बुजुर्गों की अनदेखी करने वाले बच्चों के खिलाफ एक कठोर और ऐतिहासिक कानून पारित किया है। इस नए नियम के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी अपने माता-पिता को बेसहारा छोड़ता है, तो उसके वेतन से सीधे पैसे काटकर उसके माता-पिता के बैंक खाते में भेज दिए जाएंगे। तेजी से बदलती जीवनशैली के बीच, यह कानून बुजुर्गों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा माना जा रहा है।


15 प्रतिशत वेतन की कटौती, सभी पर लागू


इस सख्त कानून का उद्देश्य उन लापरवाह कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराना है जो अपने माता-पिता को उनके हाल पर छोड़ देते हैं। नए प्रावधान के तहत, यदि कोई दोषी पाया जाता है, तो उसके वेतन से 15 प्रतिशत या अधिकतम 10,000 रुपये की कटौती की जा सकती है। यह नियम केवल सरकारी कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र के कर्मचारियों पर भी लागू होगा। यहां तक कि सांसद, विधायक और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि भी इस कानून के दायरे में आएंगे।


सौतेले माता-पिता भी शामिल, सीएम का सख्त संदेश


यह कानून तकनीकी दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। इसमें परिवार की परिभाषा को विस्तारित करते हुए जैविक माता-पिता के साथ-साथ सौतेले माता-पिता को भी अधिकार दिए गए हैं। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने इस विधेयक को पेश करते हुए स्पष्ट किया कि समाज में बुजुर्गों की उपेक्षा को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि माता-पिता के अधिकारों की रक्षा करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है।


60 दिनों में मिलेगा न्याय, सीधे बैंक खाते में राशि


एकल परिवारों के बढ़ते चलन के कारण जो बुजुर्ग अकेले रह जाते हैं, उनके लिए इस कानून में न्याय की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। पीड़ित माता-पिता सीधे जिलाधिकारी (DM) के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उन्हें केवल एक आवेदन देकर अपनी स्थिति और आय की जानकारी देनी होगी। जिलाधिकारी इस मामले पर 60 दिनों के भीतर निर्णय सुनाएंगे। सुनवाई के बाद, एक आधिकारिक आदेश जारी होगा और तय की गई राशि सीधे कर्मचारी के वेतन से काटकर माता-पिता के बैंक खाते में भेज दी जाएगी।


रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में आयोग, हेट क्राइम पर सख्त प्रावधान


हालांकि देश में पहले से ही 2007 का भरण-पोषण कानून मौजूद है, लेकिन उसकी लंबी कानूनी प्रक्रिया को देखते हुए तेलंगाना सरकार ने इस नए कानून में समय सीमा और वेतन से सीधी कटौती का प्रावधान रखा है। इसके साथ ही, इस कानून के तहत एक 'वरिष्ठ नागरिक आयोग' बनाने का प्रस्ताव है, जिसका नेतृत्व हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज करेंगे। यह आयोग सीधे तौर पर बुजुर्गों की शिकायतों और अपीलों को सुनेगा। इसके अलावा, तेलंगाना सरकार ने सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करते हुए हेट स्पीच और हेट क्राइम पर भी एक सख्त विधेयक पेश किया है, जिसमें दोषियों के लिए 10 साल तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।