दक्षिण भारत में फिल्म सितारों की राजनीतिक वापसी: विजय का नया अध्याय
फिल्म सितारों की राजनीति में वापसी
दक्षिण भारत में फिल्मी हस्तियों का राजनीतिक प्रभाव पहले की तरह नहीं रहा। कई सितारे राजनीति में कदम रखते थे, लेकिन सफलता हासिल नहीं कर पाते थे। उदाहरण के लिए, तमिलनाडु में कैप्टेन विजयकांत ने 2005 में डीएमडीके पार्टी की स्थापना की, लेकिन चुनाव में उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। इसी तरह, कमल हसन ने भी अपनी पार्टी बनाई, लेकिन वे भी कोई खास करिश्मा नहीं दिखा सके। रजनीकांत ने भी राजनीति में कदम रखा, लेकिन अंततः उन्होंने पीछे हटने का निर्णय लिया। आंध्र प्रदेश में चिरंजीवी की पार्टी को भी निराशा का सामना करना पड़ा। केरल में सुरेश गोपी ने भी अपनी पार्टी बनाई, लेकिन उन्हें भी सफलता नहीं मिली। इस स्थिति में ऐसा लग रहा था कि एमजी रामचंद्रन, जयललिता या एनटी रामाराव जैसे नेता अब नहीं उभरेंगे, जो जनता के बीच सीधे मुख्यमंत्री बन सकें।
विजय का राजनीतिक सफर
हालांकि, फिल्म स्टार विजय ने इस प्रवृत्ति को बदलने का प्रयास किया है। उन्होंने दो साल पहले अपनी पार्टी की स्थापना की और 2024 में चुनाव लड़ने की घोषणा की। उनकी पहली राजनीतिक रैली करूर में हुई, जहां भगदड़ मच गई, जिससे कई लोगों की जान चली गई। इसके बाद, सीबीआई ने उनसे कई बार पूछताछ की। विजय की एक चुनौती यह थी कि उनके पास कोई मजबूत संगठन नहीं था और वे ईसाई समुदाय से आते हैं। अन्ना डीएमके और भाजपा के साथ तालमेल की कोशिशें भी सफल नहीं हो पाईं। उनकी पार्टी ने कहा कि चुनाव लड़ने के लिए अच्छे उम्मीदवार नहीं मिल रहे हैं। फिर भी, उन्होंने अकेले चुनाव लड़ा और दोनों द्रविडियन पार्टियों, डीएमके और अन्ना डीएमके को हराने में सफल रहे। उनकी पार्टी अब बहुमत के करीब पहुंच गई है। इस सफलता के बाद, ऐसा प्रतीत होता है कि दक्षिण भारत में फिल्म सितारों का आत्मविश्वास एक बार फिर लौटेगा।
