दिल्ली का नाम बदलकर 'इंद्रप्रस्थ' करने की मांग: भाजपा सांसद की ऐतिहासिक अपील
दिल्ली का नामकरण: एक ऐतिहासिक दृष्टिकोण
भारतीय जनता पार्टी के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने बुधवार को एक बार फिर दिल्ली का नाम 'इंद्रप्रस्थ' रखने की मांग की है। उन्होंने इसे महाभारत के काल से जोड़ते हुए बताया कि इंद्रप्रस्थ यमुना के किनारे बसा एक ऐतिहासिक शहर था, जो दिल्ली की भौगोलिक स्थिति के अनुरूप है। यह खंडेलवाल की चार महीनों में दूसरी बार की गई अपील है।
खंडेलवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में कहा कि वर्तमान नाम दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी की प्राचीन विरासत का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता। उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली की सांस्कृतिक धरोहर भारतीय सभ्यता की गहरी जड़ों को दर्शाती है।
इंद्रप्रस्थ के पुरातात्विक साक्ष्य
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने पुराना किला में खुदाई की, जिसमें 'इंद्रप्रस्थ' के अस्तित्व के प्रमाण मिले हैं। खंडेलवाल के अनुसार, यदि दिल्ली का नाम 'इंद्रप्रस्थ' रखा जाता है, तो यह राजधानी को उसकी प्राचीन सभ्यता से फिर से जोड़ देगा।
उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया कि विद्वानों का मानना है कि 'दिल्ली' नाम मध्यकालीन संदर्भों से विकसित हुआ है, जो प्रारंभिक शासक राजवंशों से संबंधित है। हालांकि, ये नाम शहर की प्राचीन पहचान का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
दिल्ली या इंद्रप्रस्थ: ऐतिहासिक संबंधों की खोज
कई साहित्यिक और पुरातात्विक साक्ष्यों के अनुसार, 'इंद्रप्रस्थ' दिल्ली का प्राचीन नाम था, जो महाभारत में पांडवों की राजधानी के रूप में वर्णित है। एएसआई की खुदाई से पता चलता है कि बस्ती की परतें लगभग 1000 ईसा पूर्व की हैं।
तोमर वंश के शासनकाल में इसे ढिल्लिका कहा जाता था, लेकिन दिल्ली सल्तनत और मुगल काल में यह 'देहली' के रूप में विकसित हुआ।
खंडेलवाल ने कहा कि 'इंद्रप्रस्थ' नाम को पुनर्स्थापित करना भारत की राजधानी की सभ्यतागत पहचान को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। इससे राष्ट्रीय गर्व को बढ़ावा मिलेगा और भारत की प्राचीन विरासत को वैश्विक स्तर पर उजागर किया जा सकेगा।
