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दिल्ली की अदालत ने कोयला घोटाले में सभी आरोपियों को बरी किया

दिल्ली की एक विशेष अदालत ने छत्तीसगढ़ के कोयला घोटाले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। इस मामले में शामिल प्रमुख व्यक्तियों में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय के भाई भी शामिल हैं। अदालत ने सीबीआई द्वारा पेश किए गए सबूतों को अपर्याप्त करार दिया, जिससे आरोपियों को बड़ी राहत मिली। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और अदालत के निर्णय के पीछे की कहानी।
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दिल्ली की अदालत ने कोयला घोटाले में सभी आरोपियों को बरी किया

कोयला घोटाले में अदालत का महत्वपूर्ण निर्णय

नई दिल्ली: दिल्ली की एक विशेष अदालत ने छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कोयला घोटाले से संबंधित मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। यह मामला 'विजय सेंट्रल कोल ब्लॉक' के आवंटन में कथित अनियमितताओं से जुड़ा था। अदालत ने नामित कंपनी एसकेएस इस्पात एंड पावर लिमिटेड सहित चार अन्य आरोपियों को भी दोषमुक्त करार दिया है, जिससे उन्हें एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद राहत मिली है।


प्रमुख आरोपियों को मिली राहत

इस फैसले से राहत पाने वालों में कंपनी के प्रबंध निदेशक अनिल गुप्ता, जॉइंट प्रबंध निदेशक दीपक गुप्ता और प्रबंधक अमृत सिंह शामिल हैं। इसके अलावा, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय के भाई सुधीर कुमार सहाय, जो कंपनी में नामित निदेशक थे, का नाम भी उल्लेखनीय है। अदालत के इस निर्णय ने इन सभी पर लगे आरोपों को खारिज कर दिया है।


CBI के सबूत साबित हुए अपर्याप्त

विशेष न्यायाधीश सुनेना शर्मा ने 23 मई को 271 पन्नों का विस्तृत निर्णय सुनाते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की दलीलों को खारिज कर दिया। जज ने स्पष्ट किया कि सीबीआई आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के गंभीर आरोपों को साबित करने में असफल रही है। अदालत ने जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत सबूतों को अपर्याप्त करार देते हुए कहा कि ये सबूत धोखाधड़ी, प्रलोभन, या गलत लाभ को साबित करने में असमर्थ रहे हैं।


सीबीआई के आरोपों का सारांश

सीबीआई ने आरोप लगाया था कि एसकेएस इस्पात एंड पावर लिमिटेड और अन्य आरोपियों ने कैप्टिव कोल ब्लॉक का आवंटन प्राप्त करने के लिए एक बड़ी साजिश रची थी। जांच एजेंसी का कहना था कि आरोपियों ने तथ्यों को छिपाकर केंद्रीय कोयला मंत्रालय के समक्ष अपनी नेटवर्थ, भूमि, निवेश और मंजूरियों के बारे में झूठे दावे किए। हालांकि, अदालत में सीबीआई के ये सभी आरोप बिना ठोस सबूतों के टिक नहीं सके।