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दिल्ली के तुर्कमान गेट पर अतिक्रमण हटाने के बाद तनाव, 10 लोग हिरासत में

दिल्ली के तुर्कमान गेट में अवैध अतिक्रमण हटाने के बाद तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस दौरान पत्थरबाजी की घटना के संबंध में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है और 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया है और पत्थर फेंकने वालों की पहचान की जा रही है। स्थानीय दुकानदारों ने सरकार के कदम की सराहना की है। जानें पूरी खबर में क्या हुआ।
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दिल्ली के तुर्कमान गेट पर अतिक्रमण हटाने के बाद तनाव, 10 लोग हिरासत में

दिल्ली में तनाव की स्थिति

नई दिल्ली: तुर्कमान गेट क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण हटाने के अभियान के बाद तनाव उत्पन्न हो गया है। इस दौरान पत्थरबाजी की घटना के संबंध में दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है और लगभग 10 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बुधवार सुबह इस मामले की जानकारी दी।


पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था

दिल्ली तुर्कमान गेट पत्थरबाजी: पुलिस ने बताया कि फैज-ए-इलाही मस्जिद के निकट सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है, जहां रात में एमसीडी ने अतिक्रमण हटाने का कार्य किया। पत्थरबाजी के मामले में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। सीसीटीवी फुटेज और बॉडी कैमरा रिकॉर्डिंग के माध्यम से पत्थर फेंकने वालों की पहचान की जा रही है।


डीसीपी की जानकारी

डीसीपी निधिन वालसन ने मीडिया को बताया कि कार्रवाई के दौरान स्थानीय निवासियों से बातचीत की गई थी। उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश दिखाए गए, जिसके बाद कई लोग लौट गए। हालांकि, कुछ लोग वापस लौटकर आए और उन्होंने पथराव किया।


बुलडोजर कार्रवाई की प्रगति

डिप्टी कमिश्नर विवेक अग्रवाल ने बताया कि डिमोलिशन का लगभग 85 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। एक छोटा सा ढांचा अभी भी बाकी है, जिसे रात में गिराया जा सकता है। हालांकि, मलबा जमा होने के कारण मशीनें उस स्थान तक नहीं पहुंच पा रही हैं। मलबा हटाने के बाद शेष ढांचे को भी गिराया जाएगा।


स्थानीय दुकानदार की प्रतिक्रिया

एक स्थानीय दुकानदार ने कहा, "मैं लंबे समय से दरगाह फैज इलाही पर नारियल का काम कर रहा हूं। मैं और मेरी पत्नी नारियल पानी बेचते हैं। सरकार का यह कदम बहुत अच्छा है। यहां होने वाली हर शादी से बीस-पच्चीस रुपए लिए जाते थे, लेकिन यह पैसा न तो मस्जिद में जाता था, न मदरसे में और न ही आश्रम में। सरकार को यह पता लगाना चाहिए कि यह पैसा कहां जा रहा था।"