दिल्ली दंगों के आरोपियों की जमानत याचिका खारिज, एक साल तक नहीं मिलेगी राहत
जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
नई दिल्ली। दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शरजिल इमाम की जमानत की अंतिम उम्मीद भी समाप्त हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही, अदालत ने उन्हें अगले एक साल तक जमानत के लिए अपील करने से भी रोक दिया है। इसका मतलब है कि दोनों को कम से कम एक साल और जेल में रहना होगा, और उसके बाद ही उनकी जमानत की याचिका पर विचार किया जाएगा।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े पांच अन्य आरोपियों को जमानत दे दी है, लेकिन उन पर 12 शर्तें भी लगाई गई हैं। उल्लेखनीय है कि इस मामले में उमर खालिद, शरजिल इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद पिछले पांच साल तीन महीने से तिहाड़ जेल में हैं। इनमें से उमर और शरजिल को छोड़कर बाकी सभी को जमानत मिल गई है।
इन सभी आरोपियों ने दिल्ली हाई कोर्ट के जमानत न देने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उन पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत मुकदमे चल रहे हैं। उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत की अपील करने से पहले पांच बार जमानत की याचिका लगाई थी, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी। यह हिंसा फरवरी 2020 में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दिल्ली यात्रा के दौरान भड़की थी, जिसमें 53 लोगों की जान गई और 250 से अधिक लोग घायल हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि उमर खालिद और शरजिल इमाम की स्थिति अन्य पांच आरोपियों की तुलना में अलग है। इन दोनों की कथित अपराधों में केंद्रीय भूमिका रही है। अदालत ने यह भी कहा कि इनकी न्यायिक हिरासत की अवधि भले ही लंबी हो, लेकिन यह संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन नहीं करती है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यूएपीए एक विशेष कानून है, जो ट्रायल से पहले जमानत देने की शर्तों को स्पष्ट करता है। अदालत ने यह भी कहा कि राज्य की सुरक्षा और अखंडता से जुड़े मामलों में देरी नहीं होनी चाहिए। खालिद और इमाम की जमानत याचिका पर एक साल तक रोक लगाई गई है, और इस दौरान जांच एजेंसियों को सभी संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी करने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद ही ये दोनों जमानत के लिए याचिका दायर कर सकेंगे।
