दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत से इनकार
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के संदर्भ में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ये दोनों एक साल तक इस मामले में जमानत के लिए आवेदन नहीं कर सकते। हालांकि, अन्य पांच आरोपियों को 12 शर्तों के साथ जमानत दी गई है। इस मामले में जस्टिस अरविंद और जस्टिस एनवी अंजारिया ने निर्णय सुनाया। अदालत ने कहा कि उमर और शरजील की स्थिति अन्य आरोपियों से भिन्न है।
दिल्ली दंगों का संदर्भ
उमर खालिद और शरजील इमाम की कथित भूमिका इन दंगों में केंद्रीय रही है। इनकी हिरासत की अवधि भले ही लंबी हो, लेकिन यह संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन नहीं करती। फरवरी 2020 में दिल्ली में हुई हिंसा में 53 लोगों की जान गई थी और 250 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस दौरान 750 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की गईं।
आरोपियों की हिरासत
उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य चार आरोपी, जो दिल्ली दंगों से जुड़े हैं, पिछले 5 साल 3 महीने से तिहाड़ जेल में हैं। इन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत जमानत देने से इनकार किया गया था। सभी आरोपी जमानत के लिए कई बार निचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक अपील कर चुके हैं।
जमानत मिलने वाले आरोपी
गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, मोहम्मद समीर खान, शादाब अहमद और शिफाउर रहमान को जमानत मिलने से उनके खिलाफ आरोपों में कोई कमी नहीं आती। उन्हें 12 शर्तों के अधीन जमानत पर रिहा किया जाएगा। यदि ये शर्तें तोड़ी जाती हैं, तो ट्रायल कोर्ट आरोपियों की सुनवाई के बाद जमानत रद्द कर सकता है।
