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दिल्ली में नस्लीय भेदभाव का मामला: दंपति को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया

दिल्ली के मालवीय नगर में एक दंपति पर अपने पूर्वोत्तर भारत से आए पड़ोसियों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियां करने का आरोप लगा है। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। यह मामला तब शुरू हुआ जब तीन महिलाएं एसी की मरम्मत करवा रही थीं और विवाद बढ़ते-बढ़ते नस्लीय टिप्पणियों में बदल गया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दंपति को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। यह घटना पूर्वोत्तर भारत के लोगों के प्रति भेदभाव की समस्या को उजागर करती है।
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दिल्ली में नस्लीय भेदभाव का मामला: दंपति को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया

दिल्ली में नस्लीय टिप्पणियों का मामला


नई दिल्ली: दिल्ली के मालवीय नगर क्षेत्र में एक दंपति पर अपने पूर्वोत्तर भारत से आए पड़ोसियों के खिलाफ नस्लीय और अपमानजनक टिप्पणियां करने का आरोप लगा है। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए दंपति को गिरफ्तार किया और अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। यह घटना 20 फरवरी को हुई, जब तीन महिलाएं, जो अरुणाचल प्रदेश से हैं, अपने किराए के घर में एयर कंडीशनर लगवा रही थीं।


विवाद की शुरुआत कैसे हुई

महिलाओं ने एसी की मरम्मत के लिए एक इलेक्ट्रीशियन को बुलाया था। काम के दौरान ड्रिलिंग से धूल नीचे वाले फ्लैट में गिर गई, जिस पर नीचे रहने वाले दंपति, रूबी जैन और उनके पति हर्ष ने आपत्ति जताई। यह विवाद पहले छोटे स्तर पर शुरू हुआ, लेकिन जल्द ही यह गाली-गलौज और नस्लीय टिप्पणियों में बदल गया।


आरोप है कि दंपति ने महिलाओं को "मोमो" और "मसाज" जैसी अपमानजनक बातें कहीं, जिससे उनकी गरिमा को ठेस पहुंची।


एफआईआर और गिरफ्तारी

मालवीय नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत मिलने के बाद एफआईआर दर्ज की गई। प्रारंभ में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत आपराधिक धमकी, महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाना और विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता बढ़ाने के आरोप लगाए गए।


बाद में, वीडियो और अन्य सबूतों के आधार पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गईं। पुलिस ने जांच के बाद दोनों को गिरफ्तार किया।


अदालत का निर्णय

बुधवार को आरोपी दंपति को मजिस्ट्रेट भानु प्रताप सिंह के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 11 मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। जांच अब एसीपी रैंक के अधिकारी की देखरेख में चल रही है और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इसकी निगरानी की जा रही है।


यह घटना एक बार फिर पूर्वोत्तर भारत के लोगों के साथ होने वाले नस्लवाद और भेदभाव की समस्या को उजागर करती है। शहरों में रहने वाले लोग विभिन्न संस्कृतियों से आते हैं, लेकिन आपसी सम्मान और समझ आवश्यक है। ऐसी घटनाएं समाज में अलगाव को बढ़ावा देती हैं।