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दिल्ली में पेयजल संकट से निपटने के लिए मुख्यमंत्री का सक्रिय प्रयास

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी में पेयजल संकट से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने हरियाणा से जल आपूर्ति बनाए रखने का आश्वासन प्राप्त किया है और जल बोर्ड को शिकायतों के त्वरित समाधान के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। जानें इस संकट से निपटने के लिए सरकार की क्या योजनाएं हैं।
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दिल्ली में पेयजल संकट से निपटने के लिए मुख्यमंत्री का सक्रिय प्रयास

दिल्ली सरकार की जल आपूर्ति योजना


दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि उनकी सरकार राजधानी के सभी निवासियों को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के लिए तेजी से काम कर रही है। सरकार ने तात्कालिक राहत उपायों के साथ-साथ दीर्घकालिक समाधान पर भी ध्यान केंद्रित किया है ताकि भविष्य में जल संकट को स्थायी रूप से नियंत्रित किया जा सके।


मुख्यमंत्री ने कहा कि गर्मी के कारण उत्पन्न जल संकट से निपटने के लिए हरियाणा ने मुनक नहर के माध्यम से 1,000 क्यूसेक जल की आपूर्ति बनाए रखने का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही, 980 से अधिक जल टैंकर और 6,000 से ज्यादा दैनिक ट्रिप के माध्यम से लोगों को राहत पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।


इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जल आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में जल मंत्री, दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष, मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।


मुख्यमंत्री ने बताया कि यमुना में जल की उपलब्धता प्रभावित होने के कारण जल आपूर्ति पर दबाव है। हरियाणा के मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद, हरियाणा ने दिल्ली को जल आपूर्ति बनाए रखने का आश्वासन दिया है।


दिल्ली जल बोर्ड के 980 जल टैंकर प्रतिदिन 6,000 से अधिक ट्रिप संचालित कर रहे हैं। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए छोटे टैंकर भी तैनात किए गए हैं।


मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जल रिसाव की घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल की एक-एक बूंद कीमती है और बर्बादी स्वीकार्य नहीं है। पिछले सप्ताह में 11,055 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 8,500 का समाधान किया गया है।


मुख्यमंत्री ने जल प्रबंधन योजनाओं पर तेजी से काम करने का निर्देश दिया, जिसमें हरियाणा से पाइपलाइन के माध्यम से जल लाने की व्यवहार्यता का अध्ययन भी शामिल है।


उन्होंने जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया और जल बोर्ड को जन जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। 75 सीएम श्री स्कूलों में वर्षा जल संचयन संरचनाएं विकसित की जा रही हैं।