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दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों की फीस वसूली पर सरकार का सख्त आदेश

दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों के लिए शिक्षा निदेशालय ने एक नया आदेश जारी किया है, जिससे अभिभावकों को राहत मिलेगी। अब कोई भी निजी स्कूल एक साथ दो या तीन महीने की फीस नहीं मांग सकेगा। यह निर्णय उन माता-पिता के लिए महत्वपूर्ण है जो एडवांस फीस वसूली के कारण आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। शिक्षा विभाग ने अभिभावकों की शिकायतों के आधार पर यह कदम उठाया है, और हाईकोर्ट के पुराने फैसले का हवाला देते हुए नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है।
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दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों की फीस वसूली पर सरकार का सख्त आदेश

दिल्ली में अभिभावकों के लिए राहत

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने वाले माता-पिता के लिए एक महत्वपूर्ण खबर आई है। शिक्षा निदेशालय (DoE) ने एक कड़ा आदेश जारी किया है, जिससे निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगेगा। अब कोई भी मान्यता प्राप्त या बिना सरकारी सहायता वाले निजी स्कूल अभिभावकों पर एक साथ दो या तीन महीने की फीस जमा करने का दबाव नहीं डाल सकेंगे। इस निर्णय से उन हजारों अभिभावकों को सीधा लाभ होगा, जो स्कूलों द्वारा एडवांस फीस वसूली के कारण आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे थे।


शिकायतों के आधार पर कार्रवाई


हाल ही में शिक्षा निदेशालय को अभिभावकों से लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कई प्राइवेट स्कूल उन पर एक साथ दो या तीन महीनों की फीस चुकाने का अनुचित दबाव बना रहे हैं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने यह नया आदेश जारी किया है। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी निजी स्कूल अभिभावकों को एक महीने से अधिक की फीस एक साथ देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। निदेशालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि एडवांस फीस मांगने की यह प्रथा माता-पिता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालती है, जिस पर रोक लगाना आवश्यक है।


हाईकोर्ट के फैसले का संदर्भ


शिक्षा निदेशालय ने अपने नए आदेश में 15 फरवरी 2019 को जारी किए गए एक पुराने सर्कुलर का उल्लेख किया है। इस सर्कुलर में 2013 के 'राहुल चड्ढा और अन्य बनाम समर फील्ड स्कूल' मामले में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण फैसले का जिक्र किया गया था। 10 अप्रैल 2013 को हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया था कि प्राइवेट स्कूल केवल मासिक आधार पर ही फीस वसूल कर सकते हैं। अब सरकार ने इसी नियम को फिर से सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है, जिससे स्कूलों की मनमानी पर पूरी तरह से रोक लग सके।