दिल्ली में शहीद दिवस पर भगत सिंह की भव्य प्रतिमा का अनावरण
शहीद दिवस पर विशेष समारोह
दिल्ली: आज शहीद दिवस के अवसर पर देश महान क्रांतिकारियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के बलिदान को याद कर रहा है। इस मौके पर राष्ट्रीय राजधानी के पार्लियामेंट स्ट्रीट स्थित आर.सी.एस. कार्यालय परिसर में एक ऐतिहासिक घटना हुई। यहां शहीद-ए-आजम भगत सिंह की एक भव्य प्रतिमा का अनावरण किया गया। इसके साथ ही, उसी परिसर में स्थित उस ऐतिहासिक कोर्ट ट्रायल रूम का भी जीर्णोद्धार किया गया, जहां अंग्रेजी हुकूमत ने भगत सिंह के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई की थी.
अनावरण समारोह में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह प्रतिमा केवल एक पत्थर की मूर्ति नहीं है, बल्कि उस क्रांतिकारी भावना का प्रतीक है जिसने युवाओं को गुलामी की जंजीरों को तोड़ने का साहस दिया। यह स्थल अब आने वाली पीढ़ियों के लिए एक तीर्थ के समान होगा, जो उन्हें माँ भारती की सेवा में समर्पित होने का संकल्प दिलाएगा.
इस विशेष अवसर पर शहीद भगत सिंह के पौत्र यादविंदर सिंह संधू, मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, प्रवेश वर्मा, रविन्द्र इन्द्राज, कपिल मिश्रा समेत अन्य लोग उपस्थित थे। पौत्र यादविंदर सिंह संधू ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पूर्वजों के बलिदान स्थलों को सहेजना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। समारोह का समापन राष्ट्रभक्ति के नारों के साथ हुआ। उपस्थित जनसमूह ने संकल्प लिया कि महान बलिदानियों के सपनों का भारत बनाने के लिए हर नागरिक अपना योगदान देगा.

दिल्ली के मंत्री रविंदर इंद्रजीत सिंह ने भी इस पहल के बारे में बात की और इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, “यह वह गलियारा है जहां कभी ‘इंकलाब जिंदाबाद’ का नारा गूंजा था और जहां भगत सिंह पर मुकदमे चले थे। भगत सिंह की प्रतिमा एक श्रद्धांजलि के रूप में स्थापित की गई है, जो लोगों, विशेष रूप से युवाओं को उनके जीवन के बारे में जानने का एक अवसर प्रदान करती है।” भारत की आज़ादी के लिए दिए गए उनके इस सर्वोच्च बलिदान को हर साल 23 मार्च को ‘शहीद दिवस’ के रूप में याद किया जाता है। यह दिन लाहौर षड्यंत्र केस और 1928 में ब्रिटिश अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या का बदला लेने में उनकी भूमिका को समर्पित है.
