दिल्ली शराब नीति मामले में सीबीआई को बड़ा झटका, सभी आरोपी बरी
दिल्ली की शराब नीति में सीबीआई का मामला धराशायी
नई दिल्ली। दिल्ली की शराब नीति में कथित गड़बड़ी और घोटाले के मामले में सीबीआई का केस पूरी तरह से विफल हो गया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी पर साजिश रचने का आरोप लगाते हुए अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य 23 आरोपियों को बरी कर दिया है। तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता भी इस मामले से मुक्त हो गई हैं। सीबीआई की विशेष अदालत ने एजेंसी की चार्जशीट पर आरोप तय करने से इनकार कर दिया, जो कि सीबीआई के लिए एक बड़ा झटका है।
विशेष अदालत के निर्णय के छह घंटे के भीतर ही सीबीआई ने इसके खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दायर कर दी। लगभग चार साल पुराने इस मामले में शुक्रवार को केजरीवाल और सिसोदिया के खिलाफ मुकदमा खारिज करते हुए अदालत ने कहा, 'दोनों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं हैं, आरोप साबित नहीं होते। सीबीआई ने साजिश गढ़ने की कोशिश की, लेकिन इसका आधार केवल अनुमान था।' सीबीआई ने इस मामले में कुल 23 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने सभी के खिलाफ आरोप तय करने से इनकार करते हुए सभी को बरी कर दिया। इसके बाद सीबीआई ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
विशेष अदालत ने सभी 23 आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि चार्जशीट में कई खामियां हैं और आरोप किसी गवाह या बयान से साबित नहीं होते। अदालत ने यह भी कहा कि चार्जशीट में विरोधाभास हैं, जो कथित साजिश की पूरी थ्योरी को कमजोर करते हैं। अदालत ने सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं। सीबीआई का केस धराशायी होने से ईडी के केस पर भी बड़ा असर पड़ेगा।
विशेष अदालत ने अपने फैसले में विवादित आबकारी नीति के संबंध में कहा कि इसमें कोई व्यापक साजिश या आपराधिक मंशा नहीं थी। अदालत ने कहा, 'अभियोजन पक्ष यानी सीबीआई का मामला न्यायिक जांच पर खरा नहीं उतरता। सीबीआई ने साजिश की एक कहानी गढ़ने की कोशिश की, लेकिन इसका आधार ठोस साक्ष्यों के बजाय केवल अनुमान था।' दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बारे में अदालत ने कहा कि उनका नाम बिना किसी ठोस सबूत के जोड़ा गया। अदालत ने कहा, 'जब मामला किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़ा हो, तब बिना पुख्ता सबूतों के आरोप लगाना कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है।'
पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के बारे में अदालत ने कहा कि उन पर आरोप था कि वे शराब नीति बनाने और लागू करने के जिम्मेदार थे, लेकिन उनके शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिला और न ही उनके खिलाफ कोई बरामदगी हुई। इस मामले के मुख्य आरोपी कुलदीप सिंह को पहले आरोपी बनाए जाने पर अदालत ने हैरानी जताई। अदालत ने उन्हें बरी करते हुए कहा कि यह हैरानी की बात है कि उन्हें पहला आरोपी क्यों बनाया गया, जबकि उनके खिलाफ कोई ठोस सामग्री नहीं थी।
