दिल्ली सरकार ने सरकारी वाहनों के उपयोग में कमी की, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की अपील
दिल्ली सरकार की नई पहल
नई दिल्ली - दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए देशवासियों से पेट्रोल और डीजल की बचत करने का आह्वान किया है। इस दिशा में, दिल्ली सरकार ने विभागीय कार्यों के लिए वाहनों की संख्या को सीमित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विशेष परिस्थिति में सभी कैबिनेट सहयोगी, भारतीय जनता पार्टी के विधायक, जनप्रतिनिधि और सरकारी अधिकारी न्यूनतम वाहनों का उपयोग कर रहे हैं। इसके साथ ही, वे कारपूल और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने दिल्लीवासियों से भी अनुरोध किया कि वे ईंधन बचाने के लिए अधिक से अधिक सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें और कारपूलिंग को अपनाएं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में मेट्रो और सार्वजनिक बसों का एक बड़ा नेटवर्क है, जो एनसीआर तक फैला हुआ है। यदि लोग निजी वाहनों की बजाय मेट्रो और डीटीसी बसों का उपयोग करेंगे, तो इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि ट्रैफिक जाम और प्रदूषण में भी कमी आएगी। जन भागीदारी से ही बड़े राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मेट्रो सेवा अब दिल्ली-एनसीआर की जीवनरेखा बन चुकी है, जिसका नेटवर्क 416 किलोमीटर तक फैला हुआ है। दिल्ली मेट्रो 303 स्टेशनों और 343 ट्रेनों के साथ प्रतिदिन 4,500 से अधिक फेरे संचालित कर रही है, जिससे 65 लाख से अधिक यात्रियों को सुविधा मिल रही है। मेट्रो के विस्तार से यात्रा का समय कम हुआ है और प्रदूषण में कमी आई है। सरकार मेट्रो सेवा के समन्वय और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि दिल्ली सरकार सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने के लिए काम कर रही है। वर्तमान में दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के पास 6,300 सक्रिय बसें हैं, जिनमें 4,538 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य 2026 तक इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाकर 7,500 करना है। इसके अलावा, दिल्ली-रोहतक, सोनीपत, पानीपत और अन्य मार्गों पर भी डीटीसी की ई-बस सेवाएं संचालित की जा रही हैं। इससे यात्रियों को सुगम और सस्ती यात्रा सुविधा मिल रही है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि ईंधन बचाना केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि यह राष्ट्रहित और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने दिल्लीवासियों से अपील की कि वे सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देकर इस प्रयास में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
