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दिल्ली हाई कोर्ट की जज ने आबकारी नीति मामले से खुद को अलग किया

दिल्ली हाई कोर्ट की जज स्वर्ण कांता शर्मा ने आबकारी नीति मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। यह निर्णय सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों के बाद लिया गया। जस्टिस शर्मा ने कहा कि इससे यह धारणा बन सकती है कि उनके और अरविंद केजरीवाल के बीच दुश्मनी है। मामले की पृष्ठभूमि में दिल्ली सरकार की 2021 की आबकारी नीति और उसके बाद की सीबीआई जांच शामिल है। जानें इस मामले में आगे क्या हुआ और आम आदमी पार्टी ने जज पर क्या आरोप लगाए हैं।
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दिल्ली हाई कोर्ट की जज ने आबकारी नीति मामले से खुद को अलग किया

जज का निर्णय और मामला

दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायाधीश स्वर्ण कांता शर्मा ने आबकारी नीति से संबंधित मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने का निर्णय लिया है। यह मामला आम आदमी पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया सहित अन्य नेताओं से जुड़ा हुआ है। जस्टिस शर्मा ने यह कदम तब उठाया जब उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों के चलते अवमानना की कार्यवाही शुरू की।


जस्टिस शर्मा का बयान

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि यदि वे इस मामले की सुनवाई करती हैं, तो अरविंद केजरीवाल और अन्य लोग यह सोच सकते हैं कि उनके बीच कोई दुश्मनी है। इसलिए, उन्होंने यह निर्णय लिया कि इस मामले की सुनवाई किसी अन्य पीठ द्वारा की जानी चाहिए।


मामले का पृष्ठभूमि

दिल्ली सरकार ने 2021 में एक नई आबकारी नीति लागू की थी। जब भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए, तो उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सीबीआई जांच का आदेश दिया। 2022 में, दिल्ली सरकार ने इस नीति को वापस ले लिया। ईडी ने अरविंद केजरीवाल को नौ बार समन भेजा, और अंततः 21 मार्च 2024 को उन्हें गिरफ्तार किया गया। 26 जून 2024 को सीबीआई ने भी उन्हें गिरफ्तार किया। 13 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद वे तिहाड़ जेल से बाहर आए।


निचली अदालत का निर्णय

इस साल फरवरी में, दिल्ली की एक निचली अदालत ने आबकारी नीति मामले में सुनवाई की और अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया सहित 23 आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया। इसके बाद, सीबीआई ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी। जब जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने मामले की सुनवाई शुरू की, तो आम आदमी पार्टी के नेताओं ने न केवल आपत्ति जताई, बल्कि जस्टिस शर्मा पर भी सवाल उठाए।


आप के आरोप

आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा आरएसएस के कार्यक्रमों में भाग ले चुकी हैं और उनके दोनों बच्चे केंद्र सरकार के लिए काम करते हैं, जो हितों के टकराव का मामला है। दिल्ली की पूर्व सीएम आतिशी ने भी इस पर सवाल उठाते हुए लिखा कि जस्टिस शर्मा ने हाल के मामलों में खुद को अलग किया, लेकिन इस मामले में ऐसा क्यों नहीं किया।


आगे की कार्रवाई

सोशल मीडिया पर आम आदमी पार्टी ने जस्टिस शर्मा के खिलाफ कई आरोप लगाए, लेकिन उन्होंने मामले से खुद को अलग करने से इनकार किया। इसके बाद, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने अदालत की कार्यवाही का बहिष्कार करने का निर्णय लिया। हालाँकि, जस्टिस शर्मा ने अचानक खुद को आबकारी नीति से अलग कर लिया, लेकिन अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, विनय मिश्रा और सौरभ भारद्वाज के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही भी शुरू कर दी है।