दिल्ली हाई कोर्ट ने दुष्यंत गौतम को दी राहत, कांग्रेस और AAP को हटाने का आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश
नई दिल्ली। अंकिता भंडारी हत्या मामले में भाजपा नेता और राज्यसभा सांसद दुष्यंत गौतम ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों के चलते दिल्ली हाई कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया। इस मामले की सुनवाई बुधवार को हुई, जिसमें अदालत ने दुष्यंत गौतम को राहत देते हुए आरोपों को मानहानिकारक मानते हुए कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया कि वे दुष्यंत गौतम से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री को तुरंत हटा दें।
गौतम की ओर से दायर मानहानि के मामले में जस्टिस मिनी पुष्करणा ने एक अंतरिम आदेश जारी किया, जिसमें दोनों राजनीतिक दलों को हत्या के मामले में भाजपा के राष्ट्रीय सचिव को कथित तौर पर 'वीआईपी' बताकर किसी भी प्रकार का कंटेंट पोस्ट करने से रोकने का निर्देश दिया गया।
हाल ही में अंकिता भंडारी हत्या मामले को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ टिप्पणियाँ की गई थीं, जिनमें दुष्यंत गौतम का नाम भी शामिल था। इन आरोपों को गौतम ने पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे उनकी छवि को नुकसान पहुँचाने की एक सोची-समझी साजिश बताया। उन्होंने इन आरोपों के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
दिल्ली हाई कोर्ट ने दुष्यंत गौतम की याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले की गंभीरता को समझा। अदालत ने पाया कि सोशल मीडिया पर फैली जानकारी प्रथम दृष्टया मानहानिकारक प्रतीत होती है, जिससे भाजपा नेता की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँच सकता है। इस आधार पर, अदालत ने कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अन्य संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया कि वे दुष्यंत गौतम से संबंधित सभी विवादास्पद पोस्ट, वीडियो और अन्य सामग्री को हटा दें।
यह उल्लेखनीय है कि 2022 में उत्तराखंड के पौड़ी जिले में वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिजॉर्ट के संचालक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था। बाद में सत्र न्यायालय ने तीनों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
