दिल्ली हाई कोर्ट में केजरीवाल के खिलाफ अवमानना मामले में जस्टिस तेजस करिया ने लिया नाम वापस
केजरीवाल के मामले में हाई कोर्ट की सुनवाई
आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल से जुड़े कानूनी मामलों ने हाल ही में काफी ध्यान आकर्षित किया है। आबकारी नीति से संबंधित मामले में, केजरीवाल ने दिल्ली उच्च न्यायालय की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से अपने केस को हटाने की याचिका दायर की थी, जिसे अस्वीकार कर दिया गया। अब, उसी अदालत के जस्टिस तेजस करिया ने एक अन्य मामले से अपना नाम वापस ले लिया है। यह मामला एक जनहित याचिका से संबंधित है, जिसमें केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य नेताओं पर अदालत की अवमानना का आरोप लगाया गया है। जस्टिस तेजस करिया के नाम वापस लेने के कारण इस मामले की सुनवाई टल गई है, और अब अगली सुनवाई गुरुवार को होगी.
जनहित याचिका का विवरण
याचिका दायर करने वाले वकील का कहना है कि केजरीवाल और अन्य नेताओं ने अदालत का वीडियो सार्वजनिक किया, जो अदालत की अवमानना के अंतर्गत आता है। यह याचिका बुधवार को सुनवाई के लिए प्रस्तुत की जानी थी। यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार और जस्टिस तेजस करिया की बेंच के समक्ष रखा गया था, लेकिन अब जस्टिस करिया ने अपना नाम वापस ले लिया है.
याचिका दायर करने वाले का परिचय
यह याचिका वकील वैभव सिंह द्वारा दायर की गई है। उनका आरोप है कि केजरीवाल और AAP के नेताओं ने कोर्ट की अवमानना करते हुए वीडियो जारी किया। इस वीडियो में केजरीवाल को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष अपनी दलीलें पेश करते हुए देखा गया था। वैभव सिंह का कहना है कि यह हाई कोर्ट के नियमों का उल्लंघन है.
तेजस करिया का परिचय
जस्टिस तेजस करिया, जो हाई कोर्ट के जज बनने से पहले एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म में वकील थे, मेटा के विभिन्न प्लेटफार्मों के लिए भी केस लड़ चुके हैं। माना जा रहा है कि इस याचिका में मेटा, X और गूगल जैसी कंपनियों को पार्टी बनाए जाने के कारण उन्होंने अपना नाम वापस लिया है, क्योंकि वह पहले इन कंपनियों के लिए वकील रह चुके हैं.
