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दिल्ली हाईकोर्ट का भारत होटल्स को बड़ा झटका: लाइसेंस फीस की मांग बहाल

दिल्ली हाईकोर्ट ने भारत होटल्स लिमिटेड को एक महत्वपूर्ण झटका देते हुए NDMC द्वारा 1063.74 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस की मांग को बहाल किया है। कोर्ट ने 'होटल द ललित' का लाइसेंस समाप्त करने का निर्णय भी बरकरार रखा है। यह मामला 1982 के लाइसेंस डीड के उल्लंघन से जुड़ा है, जिसमें होटल प्रबंधन ने NDMC की शर्तों का गंभीर उल्लंघन किया। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और कोर्ट के तर्क।
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दिल्ली हाईकोर्ट का भारत होटल्स को बड़ा झटका: लाइसेंस फीस की मांग बहाल

दिल्ली हाईकोर्ट का निर्णय

भारत होटल्स लिमिटेड को दिल्ली हाईकोर्ट से एक महत्वपूर्ण झटका मिला है। बुधवार को, नई दिल्ली म्यूनिसिपल काउंसिल (NDMC) द्वारा 1063.74 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस की मांग को फिर से मान्यता दी गई है। इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने 'होटल द ललित' का लाइसेंस समाप्त करने का निर्णय भी बरकरार रखा है.


लाइसेंस डीड का उल्लंघन

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारत होटल्स ने 1982 में NDMC के साथ किए गए लाइसेंस डीड की शर्तों का गंभीर उल्लंघन किया है, इसलिए NDMC का लाइसेंस समाप्त करने का निर्णय उचित है। कोर्ट ने होटल प्रबंधन को आदेश दिया है कि वे 90 दिनों के भीतर ललित होटल की सम्पत्ति को NDMC को सौंप दें।


फैसले का कारण

दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेदेला ने एकल जज के उस निर्णय को पलट दिया, जिसमें NDMC की नोटिसों को रद्द किया गया था। कोर्ट ने कहा कि नई दिल्ली की भूमि अत्यधिक मूल्यवान है और इसके प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण आवश्यक है।


NDMC की चिंताएं

NDMC का कहना है कि 1982 के लाइसेंस एग्रीमेंट के अनुसार, भारत होटल्स को केवल सब-लाइसेंस देने का अधिकार था, जबकि वह संपत्ति को बेच या स्थानांतरित नहीं कर सकता था। 2016 में, सब-लाइसेंसियों के नॉमिनी ने विभिन्न कंपनियों को दुकानों और ऑफिस स्पेस बेचने के लिए समझौते किए, जिसमें इंडियन विंड पावर एसोसिएशन भी शामिल है। यह स्पष्ट रूप से लाइसेंस डीड का उल्लंघन है।


कोर्ट की आपत्तियां

कोर्ट ने यह भी कहा कि लाइसेंस डीड की धारा 48 के अनुसार अधिकतम लाइसेंस फीस 2.90 करोड़ रुपये सालाना हो सकती है, जबकि लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस, भारत होटल्स से 98 करोड़ रुपये सालाना ग्राउंड रेंट मांग रहा है। इस अंतर का बोझ भी अंततः आम जनता पर पड़ता है।


मामले का इतिहास

1982 में, NDMC ने भारत होटल्स को 99 वर्षों के लिए बाराखंबा लेन पर 6.058 एकड़ भूमि दी थी, जिसमें एक पांच सितारा होटल और दो वाणिज्यिक टावर बनाने थे। प्रारंभ में लाइसेंस फीस 1.45 करोड़ रुपये सालाना निर्धारित की गई थी, लेकिन बाद में NDMC ने संपत्ति मूल्यांकन रिपोर्ट के आधार पर इसे बढ़ाकर 98 करोड़ रुपये सालाना कर दिया।


NDMC की मांग

2020 में, NDMC ने भारत होटल्स से 1063.74 करोड़ रुपये की बकाया लाइसेंस फीस की मांग की और लाइसेंस को तुरंत समाप्त करने का नोटिस जारी किया। कंपनी को 90 दिनों के भीतर होटल की संपत्ति खाली करने का निर्देश दिया गया।


आगे की स्थिति

भारत होटल्स ने कोर्ट में तर्क दिया था कि धारा 48 के अनुसार फीस में वृद्धि पहले वाली फीस से 100 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती, यानी 1.45 करोड़ से बढ़कर अधिकतम 2.90 करोड़ ही हो सकती है। इसलिए NDMC की 98 करोड़ रुपये की मांग को गलत ठहराया गया। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। अब दिल्ली हाईकोर्ट के इस निर्णय से द ललित होटल की स्थिति गंभीर हो गई है।