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दिल्ली हाईकोर्ट ने शराब नीति घोटाले में सीबीआई को दी राहत, ट्रायल कोर्ट के आदेश पर लगी रोक

दिल्ली हाईकोर्ट ने शराब नीति घोटाले से जुड़े मामले में सीबीआई को महत्वपूर्ण राहत दी है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए कहा कि जब तक अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। इस मामले में सीबीआई ने कई आरोपियों को बरी करने के फैसले को चुनौती दी है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में दलील दी कि यह एक स्पष्ट भ्रष्टाचार का मामला है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और आगामी सुनवाई की तारीख।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने शराब नीति घोटाले में सीबीआई को दी राहत, ट्रायल कोर्ट के आदेश पर लगी रोक

दिल्ली हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला


दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति से जुड़े घोटाले में सीबीआई को एक महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें सीबीआई अधिकारी की जांच में खामियों के लिए जांच कराने का निर्देश दिया गया था। इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक ट्रायल कोर्ट ईडी से संबंधित मामलों में कोई निर्णय नहीं सुनाएगा।


सीबीआई की अपील पर सुनवाई

आज जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा की पीठ ने सीबीआई की अपील पर सुनवाई की, जिसमें अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने सभी 23 आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 16 मार्च को निर्धारित की है।


सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें

सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट में अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि यह एक स्पष्ट भ्रष्टाचार का मामला है, जिसमें रिश्वत ली गई और मीटिंगों के फोरेंसिक सबूत मौजूद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने किसी एजेंसी को इतने बारीकी से सबूत इकट्ठा करते नहीं देखा और वे इसे सही साबित करना चाहते हैं।


ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सीबीआई जांच अधिकारी की जांच कराने के आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक हाईकोर्ट इस अपील पर अंतिम फैसला नहीं सुनाता, तब तक ट्रायल कोर्ट ईडी से जुड़े समानांतर केस में कोई निर्णय नहीं दे सकता। यह निर्णय सीबीआई के लिए राहत भरा साबित हो सकता है और मामले की आगे की सुनवाई में महत्वपूर्ण हो सकता है।