Newzfatafatlogo

दिव्यांगजनों के अधिकारों के लिए केंद्रीय सलाहकार बोर्ड की महत्वपूर्ण बैठक

केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत केंद्रीय सलाहकार बोर्ड की 8वीं बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में दिव्यांगजनों के अधिकारों के कार्यान्वयन, UDID कार्ड जारी करने की प्रक्रिया, और प्रमुख योजनाओं के समयबद्ध उपयोग पर चर्चा की गई। मंत्री ने समावेशिता और सशक्तिकरण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया, जिससे दिव्यांगजनों के जीवन में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।
 | 
दिव्यांगजनों के अधिकारों के लिए केंद्रीय सलाहकार बोर्ड की महत्वपूर्ण बैठक

केंद्रीय सलाहकार बोर्ड की 8वीं बैठक का आयोजन

नई दिल्ली: केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत केंद्रीय सलाहकार बोर्ड (CAB) की 8वीं बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक डॉ. अम्बेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली में आयोजित की गई। मंत्री ने कहा कि दिव्यांगजनों के जीवन में समयबद्ध सेवाओं और सशक्त संस्थागत व्यवस्थाओं के माध्यम से समावेशिता और विकास का भाव होना चाहिए।


बैठक में उठाए गए महत्वपूर्ण मुद्दे

बैठक के दौरान, डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन की समीक्षा की। उन्होंने संस्थागत तंत्र को मजबूत करने और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। मंत्री ने दिव्यांगता प्रमाणन और यूनिक डिसएबिलिटी आइडेंटिफिकेशन (UDID) कार्ड जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया।


प्रमुख योजनाओं पर चर्चा

UIDAI–UDID API एकीकरण और तमिलनाडु में 45,000 से अधिक दिव्यांगजनों की पहचान पर चर्चा की गई। मंत्री ने निजी क्षेत्र में दिव्यांगजनों को रोजगार देने वाले नियोक्ताओं के लिए प्रोत्साहनों को पुनः आरंभ करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने ADIP योजना और अन्य प्रमुख योजनाओं के अंतर्गत धनराशि के समयबद्ध उपयोग पर भी बल दिया।


CAB की भूमिका और भविष्य की योजनाएँ

CAB को केंद्र, राज्यों और हितधारकों के बीच समन्वय का महत्वपूर्ण मंच बताते हुए बी. एल. वर्मा ने नीति से क्रियान्वयन की ओर संक्रमण पर जोर दिया। सचिव वी. विद्याावती ने CAB की भूमिका को सर्वोच्च नीति-सिफारिश निकाय के रूप में रेखांकित किया। बैठक का समापन इस विश्वास के साथ हुआ कि विचार-विमर्श से व्यावहारिक सिफारिशें और कार्ययोजना सामने आएगी, जिससे दिव्यांगजन भारत की विकास यात्रा में स्वतंत्रता और गरिमा के साथ आगे बढ़ सकेंगे।