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धारूहेड़ा में युवक से लूट के चार दोषियों को 10 साल की सजा

धारूहेड़ा में एक युवक के साथ हुई लूट के मामले में चार आरोपियों को 10 साल की सजा सुनाई गई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने दोषियों पर 27 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। पीड़ित ने बताया कि उसे सुनसान सड़क पर लूट का शिकार बनाया गया। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और अदालत के फैसले के बारे में।
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धारूहेड़ा में युवक से लूट के चार दोषियों को 10 साल की सजा

धारूहेड़ा में लूट का मामला

धारूहेड़ा क्षेत्र में लगभग दो साल पहले एक युवक के साथ हुई मारपीट और लूट के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विकास गुप्ता ने चार आरोपियों को सजा सुनाई है। अदालत ने मोहल्ला रामजस नगर धारूहेड़ा के निवासी बच्चन बैरवा, गांव अलावलपुर के अमित, मोहल्ला रामनगर धारूहेड़ा के आनंद और मोहल्ला दयाराम नगर धारूहेड़ा के आनंद देव को 10 साल की कैद की सजा दी है। इसके साथ ही, अदालत ने दोषियों पर 27 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।


राजस्थान के तिजारा निवासी करण सैनी ने पुलिस को अपनी शिकायत में बताया कि वह 21 फरवरी 2024 की रात लगभग 12:10 बजे दिल्ली से लौटकर धारूहेड़ा पुलिया पर उतरा था। वहां उसे एक तीन पहिया ऑटो मिला, जिसमें पहले से चार युवक बैठे थे। वह भिवाड़ी जाने के लिए उसी ऑटो में सवार हो गया।


पीड़ित के अनुसार, ऑटो चालक और अन्य युवक उसे भगत सिंह चौक से लोहारू की ढाणी और नंदरामपुर बास रोड की ओर ले गए। जब वे सुनसान सड़क पर पहुंचे, तो आरोपियों ने उसके गले में रस्सी डालकर दबाया और लोहे की रॉड से उसके सिर और छाती पर हमला किया। इस हमले में उसे गंभीर चोटें आईं। बदमाश उसके पास रखा मोबाइल फोन, पर्स और अन्य सामान लूटकर फरार हो गए। पर्स में लगभग 5 हजार रुपये नकद, पैन कार्ड, आधार कार्ड, एटीएम और क्रेडिट कार्ड, सेना का पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, बाइक आरसी सहित अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज थे।


इसके अलावा, उसका पिट्ठू बैग भी छीन लिया गया, जिसमें कपड़े, कैंटीन का सामान, सेविंग किट, टॉर्च और अन्य कागजात थे। पुलिस ने धारूहेड़ा थाने में मामला दर्ज कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया।


जांच के बाद, पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट पेश की। पुलिस ने अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत किए और गवाहों के बयान दर्ज कराए। गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विकास गुप्ता की अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराया। अदालत ने उन्हें 10 साल की कैद और 27 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यदि जुर्माना नहीं भरा गया, तो दोषियों को एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।