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नक्सली देवजी का सरेंडर: सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता

हाल ही में, नक्सली देवजी ने सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण किया, जो माओवादी गतिविधियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता है। देवजी, जो सीपीआई माओवादी संगठन का महासचिव है, पर 135 जवानों की हत्या का आरोप है और उसके ऊपर छह करोड़ रुपये का इनाम है। यह घटना माओवादी गतिविधियों के पूर्ण खात्मे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और देवजी के जीवन के बारे में।
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नक्सली देवजी का सरेंडर: सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता

नक्सली देवजी का सरेंडर

हैदराबाद। हाल ही में एक महत्वपूर्ण मुठभेड़ में कई नक्सली मारे गए हैं, लेकिन इस बार एक प्रमुख नक्सली ने आत्मसमर्पण किया है। सुरक्षा बलों के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है, खासकर जब 135 जवानों की हत्या के आरोपी और छह करोड़ रुपये के इनामी नक्सली देवजी ने सरेंडर किया है। यह सफलता माओवादी गतिविधियों के पूर्ण खात्मे की दिशा में 31 मार्च 2026 की डेडलाइन से पहले मिली है।


देवजी, जो सीपीआई माओवादी संगठन का महासचिव है, का जन्म तेलंगाना के करीमनगर जिले के कोरुटला में एक दलित परिवार में हुआ था। पिछले साल मई में छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ में हुई मुठभेड़ में नक्सली नेता नंबाला केशव उर्फ बसवराजू के मारे जाने के बाद, देवजी को संगठन की कमान सौंपी गई थी। लगभग 62 वर्षीय देवजी को तिप्पिरी तिरुपति उर्फ संजीव पल्लव के नाम से भी जाना जाता है।


देवजी पिछले 35 वर्षों से नक्सलवाद से जुड़ा हुआ है और उसके ऊपर विभिन्न राज्यों में कुल छह करोड़ रुपये का इनाम है। वह नक्सलियों की सेंट्रल मिलिट्री कमांड का प्रमुख रह चुका है और उसे गुरिल्ला युद्ध का विशेषज्ञ माना जाता है। रानी बोदली और दंतेवाड़ा में हुए हमलों में 55 और 80 सीआरपीएफ जवानों की मौत भी देवजी के नेतृत्व में हुई थी। उल्लेखनीय है कि बसवराजू के एनकाउंटर के बाद, देवजी की पोती इतलू सुमा टिपिरी ने एक वीडियो जारी कर अपने दादा से घर लौटने की अपील की थी।