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नया साल 2026: दुनिया भर में जश्न और विविधता का संगम

1 जनवरी 2026 को दुनिया भर में नए साल का जश्न धूमधाम से मनाया गया। भारत में उत्सव का माहौल था, जबकि ऑस्ट्रेलिया में हालिया घटनाओं ने जश्न को प्रभावित किया। एशिया और यूरोप में भी विभिन्न तरीकों से नए साल का स्वागत किया गया। जानें कि कैसे किरिबाती से लेकर न्यूयॉर्क तक हर जगह लोग नए साल का जश्न मना रहे थे और गाजा में लोग शांति की कामना कर रहे थे।
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नया साल 2026: दुनिया भर में जश्न और विविधता का संगम

नया साल 2026 का जश्न


नया साल 2026: 1 जनवरी 2026 को पूरी दुनिया ने नए साल का स्वागत धूमधाम से किया। जैसे ही विभिन्न समय क्षेत्रों में आधी रात आई, आतिशबाजी ने आसमान को रंग-बिरंगा बना दिया। कुछ स्थानों पर जोरदार जश्न मनाए गए, जबकि अन्य जगहों पर शांत परंपराओं का पालन किया गया। हर देश ने अपनी सांस्कृतिक विशेषताओं के अनुसार नए साल का स्वागत किया। आइए जानते हैं कि दुनिया के कुछ प्रमुख स्थानों पर यह खुशी का पल कैसे मनाया गया।


भारत में उत्सव का माहौल

भारत में सुरक्षा के साथ दिखा उत्साह 


भारत में नए साल का जश्न पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। दिल्ली के इंडिया गेट और कनॉट प्लेस पर भारी भीड़ देखी गई। देर रात तक पार्टियों और आतिशबाजी का सिलसिला जारी रहा। सुरक्षा के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने लगभग 20,000 कर्मियों को तैनात किया। कनॉट प्लेस जैसे क्षेत्रों में शराब पीकर गाड़ी चलाने और स्टंट पर कड़ी निगरानी रखी गई।


बेंगलुरु में एमजी रोड और ब्रिगेड रोड पर रौनक छाई रही। कश्मीर घाटी के गुलमर्ग, पहलगाम और सोनमर्ग जैसे पर्यटन स्थलों पर बर्फबारी का आनंद लेने आए सैलानी नए साल का स्वागत करने में जुटे रहे। श्रीनगर के लाल चौक पर भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। पूरे देश में उत्सव का माहौल बना रहा।


नए साल में सबसे पहले प्रवेश करने वाले देश

सबसे पहले नए साल में प्रवेश करने वाले देश


प्रशांत महासागर के छोटे द्वीप राष्ट्र किरिबाती ने सबसे पहले 2026 में कदम रखा। क्रिसमस द्वीप पर स्थानीय लोग पारंपरिक तरीके से जश्न मनाने जुटे। इसके बाद न्यूजीलैंड का नंबर आया, जहां ऑकलैंड के स्काई टावर से शानदार आतिशबाजी हुई। बारिश के बावजूद हजारों लोग सड़कों पर उतरे और टावर से करीब 3500 आतिशबाजियां छोड़ी गईं, जो पांच मिनट तक लगातार चलती रहीं।




ऑस्ट्रेलिया में जश्न का माहौल

ऑस्ट्रेलिया में उदासी के साये में जश्न


सिडनी में नए साल का स्वागत हार्बर ब्रिज पर आतिशबाजी के साथ हुआ। हालांकि, कुछ हफ्ते पहले बोंडी बीच पर हुई गोलीबारी की घटना ने माहौल को प्रभावित किया। इस हमले में 15 लोग मारे गए थे। इसके बावजूद हजारों लोग जश्न में शामिल हुए। पीड़ितों की याद में एक मिनट का मौन रखा गया और पुल पर विशेष रोशनी की गई। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था बहुत सख्त थी।


एशिया में उत्सव की विविधता

एशिया की विविधता भरे उत्सव


एशिया में हर जगह अलग-अलग अंदाज देखने को मिले। जापान में लोग मंदिरों में घंटियां बजाकर नए साल की शुरुआत करते हैं। सियोल में घंटियों की आवाज और रोशनी का प्रदर्शन हुआ। सिंगापुर और बैंकॉक में आतिशबाजी ने रात को रंगीन बना दिया। दुबई के बुर्ज खलीफा पर लेजर शो, संगीत और आतिशबाजी का शानदार नजारा था। बीजिंग के पास ग्रेट वॉल पर ढोल और उत्सव हुए। लोग 2026 की टोपियां पहने नाच-गाते दिखे।


इंडोनेशिया के कुछ हिस्सों में बाढ़ के कारण बड़े आयोजन सीमित रखे गए और प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं। हांगकांग ने सुरक्षा कारणों से आतिशबाजी रद्द कर वैकल्पिक कार्यक्रम किए।


यूरोप में आतिशबाजी का जश्न

यूरोप में आतिशबाजी से चमका पूरा शहर 


यूरोप के शहरों ने परंपरा और नए तरीकों का मिश्रण पेश किया। लंदन में बिग बेन की घंटियों और टेम्स नदी पर आतिशबाजी से पूरा शहर चमक उठा। पेरिस, रोम और मैड्रिड में भी भव्य प्रदर्शन हुए। एथेंस और बर्लिन में बच्चों और पालतू जानवरों को ध्यान में रखते हुए कम शोर वाली आतिशबाजी और ड्रोन शो किए गए। अमेरिका और ब्राजील के जोशरियो डी जनेरियो में समुद्र तट पर पार्टियां, संगीत और आतिशबाजी का आयोजन हुआ।


लोग सात लहरों पर कूदकर सौभाग्य की कामना करते दिखे। न्यूयॉर्क में टाइम्स स्क्वायर पर प्रसिद्ध बॉल ड्रॉप की तैयारी जोरों पर थी, जहां अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई।


गाजा में नए साल की शुरुआत

गाजा में उम्मीद के बीच उदासी


युद्धग्रस्त गाजा में विस्थापित लोग तंबुओं में नए साल की शुरुआत कर रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि 2025 दुख और नुकसान का साल था। अब वे उम्मीद कर रहे हैं कि 2026 में शांति आए और युद्ध खत्म हो।