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नीट यूजी 2026 पेपर लीक: सीबीआई की जांच में लातूर पैटर्न का खुलासा

नीट यूजी 2026 परीक्षा के पेपर लीक मामले में सीबीआई ने एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसे 'लातूर पैटर्न' के नाम से जाना जाता है। जांच में पीवी कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे जैसे मास्टरमाइंड्स का नाम सामने आया है, जिन्होंने छात्रों की कमजोरियों का फायदा उठाकर एक संगठित रैकेट चलाया। सीबीआई अब कई कोचिंग संस्थानों से पूछताछ कर रही है और इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है। जानें इस मामले की पूरी कहानी।
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नीट यूजी 2026 पेपर लीक: सीबीआई की जांच में लातूर पैटर्न का खुलासा

सीबीआई की जांच में पेपर लीक का मामला

नीट यूजी 2026 परीक्षा के पेपर लीक के मामले में सीबीआई अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई में जाने की कोशिश कर रही है। जांच एजेंसी ने गिरफ्तार किए गए आरोपी पीवी कुलकर्णी से उन सभी परीक्षा पत्रों के बारे में पूछताछ शुरू कर दी है, जिन्हें उन्होंने अपनी गिरफ्तारी से पहले तैयार किया था। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों को संदेह है कि उनका संबंध नीट 2024 पेपर लीक सहित कई अन्य मामलों से भी हो सकता है।


महाराष्ट्र के लातूर से सामने आया यह पूरा नेटवर्क अब 'लातूर पैटर्न' के नाम से जाना जा रहा है। सीबीआई जांच से पहले स्थानीय पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस पूरे मॉड्यूल के बारे में कई महत्वपूर्ण खुलासे किए थे। फिलहाल, सीबीआई की एक टीम लगातार लातूर में सक्रिय है। एजेंसी ने प्रसिद्ध आरसीसी इंस्टीट्यूट के शिवराज मोटेगांवकर से भी पूछताछ की है। इसके अलावा, कई छात्रों और उनके अभिभावकों से भी सवाल-जवाब किए गए हैं।


जांच में यह सामने आया है कि इस नेटवर्क के मास्टरमाइंड पीवी कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे थे। दोनों ने मिलकर पुणे और महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में छात्रों तक पहुंच बनाई। यह पूरा रैकेट एक संगठित सिंडिकेट की तरह कार्य कर रहा था, जो छात्रों की कमजोरियों और मजबूरियों का लाभ उठाता था।


सूत्रों के अनुसार, इस नेटवर्क ने कई स्थानों पर सेमिनार भी आयोजित किए। इनमें ज्यादातर पुराने छात्र एजेंट के रूप में कार्य कर रहे थे, जिनमें बड़ी संख्या इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के छात्रों की बताई जा रही है।


शुरुआती जांच में लातूर का नाम सामने नहीं आया था। लेकिन एक अभिभावक की शिकायत के बाद जिला पुलिस ने अपनी जांच की जानकारी सीबीआई को दी, जिसके बाद मामला तेजी से खुलता चला गया।


वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पीवी कुलकर्णी नीट परीक्षा के पेपर सेट करने की प्रक्रिया में लंबे समय तक जुड़े रहे थे। इसी कारण अब उनसे 2024 के पेपर लीक मामले में भी पूछताछ की जा रही है।


सूत्रों का कहना है कि पीवी कुलकर्णी के पास छात्रों का विस्तृत डेटा था, जिसे उन्होंने मनीषा वाघमारे के साथ साझा किया। इसके बाद यह गैंग कोचिंग संस्थानों के मॉक टेस्ट के नतीजों के आधार पर कमजोर छात्रों की पहचान करता था और फिर उनसे संपर्क किया जाता था।


अमीर परिवारों के छात्रों से लाखों रुपए वसूले जाते थे, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों का इस्तेमाल केवल माध्यम के रूप में किया जाता था। यही कारण है कि पेपर पाने वाले छात्रों में कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने 25 लाख रुपए तक दिए, जबकि कुछ ने केवल 25 हजार रुपए चुकाए।


पुणे पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नीट परीक्षा के दिन मनीषा वाघमारे के बैंक खाते में 10 लाख रुपए ट्रांसफर हुए थे। इसके अलावा, कई छात्रों ने भी उसके खाते में 25-25 हजार रुपए जमा किए थे।


महाराष्ट्र में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के बड़े केंद्र के रूप में पहचान रखने वाला लातूर अपने शानदार रिजल्ट्स के कारण 'लातूर पैटर्न' के नाम से मशहूर रहा है। यहां सैकड़ों कोचिंग संस्थान हैं और हर साल बड़ी संख्या में छात्र नीट पास करते हैं। लेकिन अब यही 'लातूर पैटर्न' पेपर लीक विवाद के बाद जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गया है।


सीबीआई अब कई कोचिंग संस्थानों और उनके संचालकों से पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि पीवी कुलकर्णी ने अपने पद और पहुंच का उपयोग कर कुछ संस्थानों तक लीक पेपर पहुंचाए। फिलहाल जब्त दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैंक लेनदेन की फॉरेंसिक जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।